भारतीय लड़कियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सेमिफाइनल में ऐतिहासिक जीत

भले ही हम 21वीं सदी में जी रहे हैं, पर यह दुनिया अभी पुरुषों के वर्चस्व की है। महिलाएं जीवन के सभी क्षेत्रों में अपनी काबिलियत साबित कर रही हैं, धरती से अंतरिक्ष तक अपनी प्रतिभा, क्षमता और योग्यता का परिचय दे रही हैं। खुद को साबित कर रही हैं कि वे किसी भी तरह से पुरुषों से कमतर नहीं हैं। खेल की दुनिया में भी उन्हें रोज-ब-रोज यह साबित करना पड़ता है कि वे किसी पुरुष खिलाड़ी या पुरुष टीम से कम नहीं हैं। पुरुष वर्चस्व हमारे दिल-दिमाग में किस कदर है इसका अंदाज हम इससे लगा सकते हैं कि करीब-करीब हर खेल प्रेमी, विशेषकर भारत का राष्ट्रीय खेल बन चुके क्रिकेट के प्रेमी को भारतीय पुरुष टीम के सभी सदस्यों का नाम जुबान पर होता है। चाहे वह टेस्ट टीम हो, चाहे वह एकदिवसीय टीम हो या टी-20 हो।

यहां तक की सभी आईपीएल की टीमों के सदस्यों का नाम भी जानते हैं। पूर्व क्रिकेट पुरुषों को भी जानते हैं। भारत की कौन कहे, भारतीय क्रिकेट प्रेमी विश्व के अन्य देशों के टीमों के खिलाड़ियों का नाम भी जानते हैं, लेकिन नहीं के बराबर ऐसे क्रिकेट प्रेमी मिलेंगे, जो वर्तमान महिला टीम के उन 11 सदस्यों का नाम भी न जानते हों, जिन्होंने विश्व क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। संभव है कि बहुत सारे क्रिकेट प्रेमी जेमिमाह रोड्रिग्स को न जानते हों, जिन्होंने 127 रनों की बेजोड़ नॉटऑउट पारी खेली।

उनकी इस पारी ने यह सभंव बनाया कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम विश्व क्रिकेट इतिहास में पहली बार 333 रनों के टारगेट को चेस करने में सफल हुई। यह कारनामा महिला-पुरुष दोनों के क्रिकेट के इतिहास में पहली बार हुआ है। यह भी संभव है कि कुछ क्रिकेट प्रेमी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर को भी न जानते हों, जिन्होंने 89 रनों की शानदार पारी खेली। उनकी यह पारी जीत का आधार बनी। हो सकता है कि हम दीप्ती शर्मा और ऋचा घोष को भी नहीं जानते हों, जिनकी ताबड़तोड़ पारी के बिना यह जीत संभव नहीं होती।

महिला क्रिकेट टीम की यह जीत इतनी ऐतिहासिक क्यों है?

पहली बात तो यह है कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने आस्ट्रेलिया की उस टीम को हराया है, जो इस विश्व कम में अब तक एक मैच भी नहीं हारी थी। वह अब तक की अपराजेय टीम रही है। दूसरी बात यह है कि महिला टीम ने उस टीम को सेमीफाइनल में हराया है, जो अब तक सात बार विश्व कप जीत चुकी है। अब तक महिला विश्व कप क्रिकेट के इतिहास में 7 बार आस्ट्रेलिया, 4 बार इंग्लैंड और एक बार न्यूजीलैंड ने महिला क्रिकेट विश्व कप जीता है।

हालांकि इसके पहले भारतीय क्रिकेट टीम दो बार ( 2005, 2017) फाइनल में पहुंची है। कोई दूसरी एशियाई टीम सेमीफानल तक भी अभी तक नहीं पहुंच पाई है। तीसरी बात यह है कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने 333 रनों के टारेगट को सिर्फ 5 विकेट खोकर हासिल किया। यह विश्व क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी चेज करके हासिल की गई जीत है।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम सच्चे अर्थों में एक भारतीय टीम हैं। इसमें सभी धर्मों, सामाजिक समूहों, भाषाओं और क्षेत्रों की लड़कियां हैं। 127 रनों की शानदार नॉटऑउट पारी खेलने वाली जेमिमाह रोड्रिग्स महाराष्ट्र की हैं और ईसाई समुदाय से हैं। हरमनप्रीत कौर ( कप्तान) सिख हैं और पंजाब की हैं, जिन्होंने 89 रनों की शानदार पारी खेली। स्मृति मंधाना ( उपकप्तान) महाराष्ट्र की हैं। ताबड़तोड़ 24 रनों की पारी और दो महत्वपूर्ण विकेट हासिल करने वाली दीप्ती शर्मा यूपी की हैं।

अंतिम विजयी रन बनाने वाली अमनजोत कौर पंजाब की सिख हैं।ऋचा घोष ( विकेट कीपर) पश्चिम बंगाल की हैं। प्रातिका रावल दिल्ली की हैं। अरुधती रेड्डी आंध्रा की तेलगु भाषी हैं। हरलिन देवल दिल्ली की हैं। शेफाली वर्मा हरियाणा की हैं। राधा यादव दिल्ली से हैं। क्रांति गौड़ कर्नाटक की कन्नड़ भाषी हैं। श्री चरणी ( एन.आर. शरीण) तमिलनाडु की तमिल भाषी हैं। हालांकि भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम में भी भारत की हर तरह की विविधता का प्रतिनिधित्व है।

आस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय महिला क्रिकेट टीम की इस ऐतिहासिक जीत में जेमिमाह रोड्रिग्स की ऐतिहासिक पारी कपिलदेव की 175 रनों की उस ऐतिहासिक पारी की याद दिलाती है, जो उन्होंने 1983 के विश्व कप में जिम्मबाबे खेली थी। 1983 में पहली बार कपिल देव के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट टीम ने विश्व कप जीता था। उसके बाद भारतीय क्रिकेट टीम की दशा और दिशा बदल गई। क्रिकेट लोगों का सबसे प्रिय खेल बन गया। यदि भारतीय महिला टीम विश्व कप जीतती है तो जेमिमाह रोड्रिग्स की यह पारी कपिल देव की पारी की तरह याद रखी जाएगी।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की यह जीत और जेमिमाह रोड्रिग्स की ऐतिहासिक पारी भारतीय लड़कियों के लिए एक प्रेरणास्रोत बनेगी। पिछले तीस सालों के भारत में जो सबसे बड़ी सकारात्मक तब्दीलियां दिखाई दे रहीं हैं, उसमें एक लड़कियों की जिंदगी में होने वाला सकारात्मक परिवर्तन हैं। विभिन्न कारणों से लड़कियों ने काफी आजादी हासिल की है। बहुत तेजी से शिक्षा संस्थानों में उनका प्रवेश बढ़ा है। उन्होंने तेजी से घर की चारदीवारी को तोड़ा है। उनके पहनने-ओढ़ने, बोलने-बतियाने और जीने के अन्य तौर-तरीकों में सकारात्मक परिवर्तन आया। वे अपने हिसाब से अपनी जिंदगी जीने के लिए हर स्तर संघर्ष कर रही हैं। वे गुंगी गुड़िया की छवि को तोड़ चुकी हैं। उनकी दुनिया मायके-ससुराल तक सीमित नहीं रह गई है।

मोबाइल और सोशल मीडिया ने उन्हें पूरी दुनिया से जोड़ दिया है। वे देख रही हैं कि कैसे लड़कियां पूरी दुनिया में आजादी के साथ जी रही हैं। भारतीय पुरुष भी अपनी जीवन-संगिनी को एक हद तक ही सही साथी भाव से देख रहे हैं। लड़कियां आजादी का स्वाद चख चुकी हैं, हालांकि उन्हें अपनी आजादी को व्यवहार में उतारने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा है, कुर्बानियां भी देनी पड़ रही हैं। भारत में महिलाओं की आजादी का भले ही कोई संगठित आंदोलन न चल रहा हो,लेकिन भारतीय लड़कियां हर स्तर पर पितृसत्ता-मर्दवाद को चुनौती दे रही हैं। भारतीय क्रिकेट टीम की लड़कियों का यह शानदार प्रदर्शन, उनका जूझने का माद्दा, उनका जोश, उनकी बहादुरी और उनका जज्बा भारतीय लड़कियों के लिए एक प्रेरणास्रोत बनेगा।

इस सेमीफाइनल मैच की मैन ऑफ द मैच और मुख्य सितारे जेमिमाह रोड्रिग्स का यह बयान उनके लिए निराश,हताशा और ना उम्मीदी के क्षणों में प्रेरणास्रोत बनेगा कि “डरो मत,स्थिर खड़े रहो”। जेमिमाह लगातार तनाव और निराशा के क्षणों गुजरीं। वह टीम के 11 खेलने वाले सदस्यों से बाहर भी हुईं। वह रोईं-चिल्लाईं, लेकिन हिम्मत नहीं हारीं। उन्होंने टीम में वापसी की। 5वें नंबर खेलने वाली जेमिमाह को तीसरे नंबर पर भेजा गया, उस समय जब टीम गहरे संकट में दिख रही थी। सामने 333 रनों का पहाड़ था। वह स्थिर रहीं, डटी रहीं। उन्होंने शतक पूरा होने का जश्न नहीं मनाया, क्योंकि भारतीय टीम जीत से दूर थी। जब टीम जीत गई, तो वह चीख पड़ीं। खुशियों का सैलाब आंसुओं के रूप में सामने आया। महिला क्रिकेट टीम की सारी लड़कियां खुशी से नाच उठीं।

महिला टीम की यह जीत और जश्न पुरुष टीम से एक मायने में अलग था। उन्हें सिर्फ एक क्रिकेटर के रूप में ही नहीं, यह लड़की के रूप में भी खुद को साबित करना होता है। इस जीत और जश्न में भारतीय टीम की जीत का गौरव, अलग-अलग खिलाड़ियों के योगदान का गौरव तो शामिल था ही, पितृसत्ता के खिलाफ उनके चलने वाले निरंतर संघर्ष का भी गौरव शामिल रहा होगा।

महिला क्रिकेट टीम की इस जीत से महिला क्रिकेट और उनकी जीत पुरुष क्रिकेट और पुरुष क्रिकेट टीम से जीत से दोयम दर्जे की है, शायद यह मिथ टूटे। शायद यह देश और क्रिकेट प्रेमी महिला क्रिकेट टीम और महिला क्रिकेट खिलाड़ियों को भी उसी तरह सिर आंखों पर बैठाए जैसे पुरुष टीम को बैठाए हैं। उन्हें वही सम्मान और इज्जत मिले, जो पुरुष टीम को प्राप्त है। शायद उनका भी नाम लोगों की जुबान पर वैसे ही हो, जैसे पुरुष टीम के सदस्यों का नाम जुबान पर होता है। शायद मीडिया औैर क्रिकेट विशेषज्ञ भी महिला खिलाड़ियों को उतना ही तवज्जों दें, जितना पुरुष टीम को देते हैं।

महिला क्रिकेट टीम की यह जीत और महिला खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन भारत की उन लड़कियों और महिलाओं के लिए भी निश्चित पर प्रेरणा का स्रोत बनेगा, जो अपनी जिंदगी के संघर्षों में आशा-निराशा, उम्मीदी-नाउम्मीदी से जूझ रही हैं। जो अपने लिए जीवन के सभी क्षेत्रों में गरिमा, सम्मान, इज्जत और बराबरी के लिए संघर्ष कर रही हैं। महिला क्रिकेट खिलाड़ियों को इस शानदार जीत के लिए बधाई।

(सिद्धार्थ रामू की रिपोर्ट।)

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