पुणे की विवादास्पद ज़मीन का 99% मालिक होने के बावजूद अजित पवार के बेटे का नाम एफ़आईआर में नहीं

पुणे भूमि घोटाले के खुलासे के बाद, महाराष्ट्र राज्य पुलिस ने इसमें शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, लेकिन विशेष रूप से उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार को इससे बाहर रखा, जो पुणे की 99 प्रतिशत भूमि के मालिक हैं।

पार्थ पवार और उनके रिश्तेदार दिग्विजय सिंह पाटिल ने 40 एकड़ ज़मीन 300 करोड़ रुपये में खरीदी थी, जबकि बाज़ार में इसकी क़ीमत 1,800 करोड़ रुपये थी। महार वतन नाम से जानी जाने वाली यह ज़मीन मूल रूप से दलित भूमिहीन किसानों के लिए थी।

राज्य राजस्व विभाग के निर्देश पर, पुलिस ने पुणे ज़मीन सौदे में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। हालाँकि, पार्थ पवार को इसमें शामिल नहीं किया गया। दिलचस्प बात यह है कि ज़मीन खरीदने वाली कंपनी अमाडिया में केवल एक प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले दिग्विजयसिंह पाटिल का नाम भी एफआईआर में शामिल है।

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि जिस तरह से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अजित पवार और उनके बेटे का बचाव कर रहे हैं, उससे संकेत मिलता है कि सरकार उचित जांच करने की बजाय घोटाले को छुपाने में अधिक रुचि रखती है।

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि पुणे ज़मीन सौदे के दौरान जिन लोगों के नाम दस्तावेज़ों में दर्ज थे, उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है। चूँकि रजिस्ट्रेशन के समय पार्थ पवार का नाम नहीं था, इसलिए उनके ख़िलाफ़ कोई एफ़आईआर दर्ज नहीं की गई। मंत्री ने कहा, “अगर जाँच के दौरान पार्थ पवार का नाम सामने आता है, तो उसे एफ़आईआर में शामिल किया जाएगा।”

विपक्षी नेताओं ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि सरकार और पुलिस ने मुख्य मालिक पार्थ पवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की, जबकि दिग्विजयसिंह पाटिल का नाम लिया, जिनके पास सिर्फ एक प्रतिशत स्वामित्व है।

कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने कहा, “अगर अधिकारी विवरण की जाँच करें, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि अमाडिया के असली मालिक पार्थ पवार ने इस सौदे को अंजाम देने के लिए दिग्विजयसिंह पाटिल को केवल एक पावर ऑफ अटॉर्नी दी थी। इससे पार्थ असली मालिक बन जाते हैं। फिर भी, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, सिर्फ़ इसलिए कि वह उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे हैं।”

इस बीच, इस्तीफे के दबाव के बाद अजित पवार ने कहा कि विवादास्पद पुणे भूमि सौदा रद्द कर दिया गया है और इसके लिए दस्तावेज भी जमा कर दिए गए हैं। पार्थ पवार ने राजस्व विभाग को पुणे ज़मीन सौदे को रद्द करने की अपनी मंशा से अवगत करा दिया है। उन्होंने बताया कि बिक्री विलेख रद्द करने के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ पहले ही पंजीकरण प्राधिकारी को जमा कर दिए गए हैं।

महाराष्ट्र राजस्व विभाग ने इस सौदे के सिलसिले में उप-पंजीयक रवींद्र तारू को निलंबित कर दिया था। राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि मामले की आगे की जांच के लिए तारू, विक्रेता और क्रेता के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर ली गई है।

इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को एनसीपी अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़े एक कथित लैंड डील में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर दी है। समिति का नेतृत्व राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खड़गे करेंगे। मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि राजस्व विभाग ने संबंधित तहसीलदार सूर्यकांत येवाले को निलंबित कर दिया है।

यह डील पुणे के कोरेगांव पार्क इलाके में 40 एकड़ महार वतन भूमि से जुड़ी है। यह वंशानुगत भूमि-स्वामित्व से जुड़ा है जहाँ अनुसूचित जाति के महार समुदाय को ग्राम प्रशासन के लिए श्रम प्रदान करने के लिए बाध्य किया जाता था और भूमि (वतन भूमि) उन्हें दे दी जाती थी। ऐसी ज़मीन राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना बेची नहीं जा सकती है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि जमीन की कुल कीमत 1800 करोड़ रुपये थी, लेकिन इसे पवार की कंपनी को मात्र 300 करोड़ रुपये में बेच दिया गया, जिसमें स्टांप शुल्क में छूट भी शामिल है।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस डील में गड़बड़ी के सवालों पर नागपुर में पत्रकारों से कहा, ‘मैंने इस मुद्दे पर सभी जानकारी मांगी है। राजस्व विभाग, आईजीआर और भूमि रिकॉर्ड से सभी दस्तावेज मंगाए गए हैं। मैंने उचित जांच के निर्देश दिए हैं। शुरुआती स्तर पर गंभीर मुद्दे सामने आ रहे हैं। इसलिए, ज़रूरी जानकारी मिलने के बाद ही मैं कुछ कहूंगा।’ द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार फडणवीस ने जोर देकर कहा, ‘मुझे विश्वास है कि उपमुख्यमंत्री भी ऐसी डील का समर्थन नहीं करेंगे। सरकार में हमारी एकमत है कि जहाँ भी अनियमितता हुई है, वहां कार्रवाई होनी चाहिए। हम जांच करेंगे कि अनियमितता हुई या नहीं, और उसके अनुसार कदम उठाएंगे।’

आरोप लगाया जा रहा है कि यह डील अमेडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी से जुड़ी है। इस कंपनी में पार्थ पवार और दिग्विजय पाटिल पार्टनर हैं। आरोप है कि इस भूमि को 300 करोड़ रुपये में खरीदा गया, जबकि उसकी वास्तविक क़ीमत 1800 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी को माफ़ कर दिया गया। कहा जा रहा है कि यह भूमि ‘महार वतन भूमि’ है जिसको आसानी से बेचा नहीं जा सकता है। इसको बेचने के लिए राज्य सरकार की पूर्व अनुमति ज़रूरी है।

विपक्षी दलों ने इस डील को ‘भूमि घोटाला’ क़रार देते हुए सरकार पर निशाना साधा है। आरोप है कि 22 अप्रैल 2025 को कंपनी ने आईटी पार्क और डेटा सेंटर बनाने का प्रस्ताव पास किया और 48 घंटों के अंदर उद्योग निदेशालय ने स्टांप ड्यूटी माफ़ कर दी। शिवसेना (यूबीटी) के नेता अंबादास दानवे ने कहा, ‘पवार की कंपनी का शेयर कैपिटल केवल 1 लाख रुपये है, फिर भी 1800 करोड़ की भूमि 300 करोड़ में खरीद ली। 40 एकड़ भूमि के लेन-देन की स्टांप ड्यूटी केवल 500 रुपये! बिना अनुभव वाली कंपनी के प्रस्ताव को निदेशालय ने मंजूरी कैसे दे दी?’

बारामती से सांसद सुप्रिया सुले (एनसीपी-एसपी) ने सरकार से स्पष्टता मांगी। उन्होंने कहा, ‘सबसे पहले सरकार बताए कि डील हुई या नहीं। पहले कहा गया कि 21 करोड़ की स्टांप ड्यूटी माफ हुई, अब कह रहे हैं 6 करोड़। स्टांप ड्यूटी भरी गई या नहीं?’ सुले ने सरकार के भ्रमित संकेतों पर सवाल उठाए, ‘पहले कहा डील नहीं हुई, फिर स्टांप ड्यूटी कैसे भरी? महाराष्ट्र सरकार हमें भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री को रिकॉर्ड साफ करना चाहिए। तहसीलदार कह रहे हैं कि उन्होंने डील पर हस्ताक्षर नहीं किए, तो डील हुई या नहीं? कैसे निलंबित कर सकते हैं?’

पुणे के विवादित भूमि सौदे को लेकर उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस विवादास्पद लेनदेन रद्द कर दिया है। विपक्षी दलों की तरफ से इस्तीफे की मांग और विवाद बढ़ने के बीच शुक्रवार को अजीत पवार ने कहा, उनके बेटे पार्थ और उनके व्यावसायिक साझेदार ने पुणे में जमीन खरीदी। हालांकि, दोनों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि पुणे में उनकी कंपनी जो जमीन खरीद रही है, वह सरकारी संपत्ति है।

दरअसल यह मामला 300 करोड़ रुपये की एक जमीन खरीद से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर पार्थ पवार से जुड़े एक फर्म का नाम भी शामिल है। इस सौदे में अनियमितताओं के आरोप उठे हैं, जिसके चलते सरकार ने एक सब-रजिस्ट्रार को निलंबित किया है और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही, लेन-देन से जुड़े तीन लोगों पर एफआईआर भी दर्ज की गई है।

एक अधिकारी के अनुसार, पुणे के पॉश इलाके मुंधवा में महार (अनुसूचित जाति) समुदाय की जमीन बेची गई है। एसटी श्रेणी की ये 40 एकड़ ‘महार वतन’ वंशानुगत भूमि अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी को बेची गई। इसका प्रतिनिधित्व उसके साझेदार दिग्विजय अमरसिंह पाटिल करते हैं। डील के दौरान 21 करोड़ रुपये का स्टांप शुल्क माफ किया गया। पार्थ पवार भी इस फर्म में साझेदार हैं।

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