एक क्लिक पर असली नंबर की नकली सिम, 700 रुपये में बिका हर ओटीपी और वोटर लिस्ट से नाम गायब करने का प्रयास! ‘वोट चोरी’ का ये हाई-टेक खेल अब पकड़ा गया है। इस टकनीक से अमेरिका से ओटीपी चुराया। बंगाल में बेचा। कलबुर्गी में 6 हजार वोट काटने की कोशिश की! कर्नाटक की एसआईटी ने पूरा नेटवर्क खोलकर रख दिया है।
यह मामला है कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में 2022-23 में 5,994 वोटरों के नाम मतदाता सूची से गैर-कानूनी तरीके से हटाने की कोशिश का। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी ने खुलासा किया है कि इस पूरी साजिश का केंद्र बिंदु था अमेरिका की एक वेबसाइट एसएमएसअलर्ट और भारत में चल रही ओटीपीबाजार डॉट कॉम और पश्चिम बंगाल के नदिया जिले का 27 वर्षीय युवक बापी आद्य।
खुलासे के अनुसार अमेरिका की वेबसाइट वर्चुअल सिम कार्ड’ बेचती है। ये वर्चुअल सिम असली भारतीय मोबाइल नंबरों की डुप्लीकेट कॉपी बनाते हैं। जब चुनाव आयोग की वेबसाइट पर किसी वोटर के नंबर पर ओटीपी भेजा जाता है, तो वह ओटीपी असली फोन के साथ-साथ एसएमएसअलर्ट के वर्चुअल सिम पर भी आ जाता है। असली फोन मालिक को समझ नहीं आता कि अचानक चुनाव आयोग का ओटीपी क्यों आया, क्योंकि उन्होंने खुद कुछ रजिस्टर नहीं किया होता है।
दूसरी तरफ ओटीपीबाजार डॉट कॉम के जरिए ये ओटीपी रियल-टाइम में कलबुर्गी के डेटा सेंटर को मिल जाता था। डेटा सेंटर से फिर हजारों फर्जी आवेदन डाले जाते थे कि ‘फलां-फलां वोटर का नाम हटाया जाए’। हर ओटीपी की कीमत सिर्फ 700 रुपये!
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एसआईटी को पता चला है कि कलबुर्गी डेटा सेंटर के संचालक हर ओटीपी के लिए ओटीपीबाजार को 700 रुपये ट्रांसफर करते थे। बंगाल का बापी आद्य यह पैसा अपने इंडसइंड बैंक खाते में लेता था, फिर छोटा-सा कमीशन रखकर बाकी क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट से एसएमएसअलर्ट को भुगतान कर देता था।
रिपोर्ट के अनुसार, 13 नवंबर को एसआईटी ने पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के घुगरागाछी-हंसखाली इलाके से 27 साल के बापी आद्य को गिरफ्तार किया। वह इस मामले में पहली गिरफ्तारी थी। पहले मोबाइल रिपेयर की दुकान चलाने वाला बापी लगातार ऑनलाइन रहता था और उसे एसएमएसअलर्ट का पता चला।
उसने कमीशन के लालच में भारत में इसका इंटरफेस बनाकर ओटीपीबाजार डॉट कॉम के नाम से वेबसाइट शुरू कर दी। बहरहाल, बुधवार को 14 दिन की एसआईटी कस्टडी पूरी होने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
सितंबर 2025 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आलंद में बड़े पैमाने पर वोट काटे जाने का आरोप लगाया था। ठीक दो दिन बाद कर्नाटक सरकार ने एसआईटी गठित कर दी। उससे पहले कलबुर्गी पुलिस की जांच कोई खास प्रगति नहीं कर पाई थी।
एसआईटी ने पाया कि कुल 72 वास्तविक भारतीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया गया। ये नंबर 17 अलग-अलग राज्यों के लोगों के थे। इनके ज़रिए चुनाव आयोग की वेबसाइट पर लॉग-इन कर 5994 वोटरों के नाम हटाने के लिए 3000 से ज्यादा फर्जी आवेदन डाले गए थे। चूँकि एसएमएसअलर्ट अमेरिका में रजिस्टर्ड है, इसलिए एसआईटी अब म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी के तहत अमेरिकी अधिकारियों से पूरी डिटेल मांगेगी।
रिपोर्ट के अनुसार एसआईटी को सबूत मिले हैं कि कलबुर्गी क्षेत्र के कुछ बीजेपी नेताओं ने इस डेटा सेंटर की सेवाएँ ली थीं। अक्टूबर में एसआईटी ने डेटा सेंटर संचालक मोहम्मद अकरम, अशफाक और तीन अन्य के साथ-साथ 2023 में आलंद से बीजेपी उम्मीदवार रहे सुभाष गुट्टेदार और उनके करीबियों के ठिकानों पर छापे मारे थे। जाँच में पता चला कि हर गैर-कानूनी वोट डिलीट करने के लिए डेटा सेंटर संचालकों को 80 रुपये मिलते थे।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि वोट काटने की कोशिश उन बूथों और उन मतदाताओं पर हुई जो इसके वोटर माने जाते हैं। रिपोर्टों में तो यह भी कहा गया कि कलबुर्गी क्षेत्र की कई अल्पसंख्यक-बहुल सीटों पर 2023 चुनाव से पहले इसी तरह वोटर लिस्ट में जोड़ने-हटाने का खेल चलाया गया था।
राहुल गांधी के आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने अपनी ऑनलाइन सेवाओं के लिए अब आधार-लिंक्ड ओटीपी सिस्टम लागू कर दिया है। पहले सिर्फ मोबाइल नंबर पर ओटीपी आता था, जिसका इस मामले में भयानक दुरुपयोग हुआ था।
यह पूरा मामला न सिर्फ चुनावी धांधली की नई तकनीक को उजागर करता है, बल्कि यह भी बता रहा है कि कैसे विदेशी वेबसाइटों का इस्तेमाल कर भारत के लोकतंत्र की जड़ों पर चोट की जा सकती है। एसआईटी की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई और नाम सामने आ सकते हैं।