अरावली : रांची में हुआ प्रदर्शन

रांची। अरावली के मुद्दे पर आज (28 दिसंबर) को झारखंड की राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर प्रदर्शन हुआ जिसमें भाकपा माले, झारखंड जनाधिकार महासभा, आइसा, ऐपवा, आदिवासी संघर्ष मोर्चा सहित विभिन्न संगठनों के सदस्यों ने हिस्सा लिया।

“अरावली बचाओ, अडानी भगाओ” के नारों के साथ पर्यावरण बचाने को लेकर एकत्रित हुए लोगों ने कहा कि सिर्फ़ ऊंचाई के पैमाने पर अरावली को परिभाषित करने से कई ऐसी पहाड़ियों पर खनन और निर्माण के लिए दरवाज़ा खुल जाने का ख़तरा पैदा हो जाएगा जो 100 मीटर से छोटी हैं।

उपस्थित लोगों ने अरावली की इस नयी परिभाषा के खिलाफ़ और पूंजीपतियों के लिए रास्ते तैयार करने और आदिवासियत के लिए खतरे लाने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि अरावली पर्वतमाला में जंगल की कटाई और खनन से पूरे देश के पर्यावरण पर खतरा मंडरा रहा है। उस पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के बचाव में जो फैसला दिया है वह बहुत ही चिंता जनक है।

वक्ताओं ने कहा कि भाजपा की सरकार सरकारी संस्थाओं और न्यायपालिका का गलत इस्तेमाल कर अडानी-अंबानी के हित में देश के जल, जंगल, जमीन के साथ खिलवाड़ कर रही है। जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी के साथ आज के वर्तमान भारत के पर्यावरण पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। जाहिर है सरकार को इससे कोई सरोकार नहीं है। 

वहीं झारखंड में बड़कागांव से लेकर सारंडा के जंगलों में भी हो रही कटाई के खिलाफ भी आज के प्रदर्शन में आवाज बुलंद की गई।

वक्ताओं ने कहा कि एक तरफ देश की राजधानी दिल्ली प्रदूषण का मार झेल रही है, दूसरी तरफ जिन इलाकों में जंगल है वहां पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर जंगलों का और पहाड़ों का सफाया सिर्फ पूंजीपतियों को लाभ देने के लिए किया जा रहा हैं। ऐसे में हमें  आंदोलनों को और तेज कर, बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरने की जरूरत हैं। देश की जनता सरकार को और पूंजीपतियों को देश के पर्यावरण से खेलने और जल, जंगल, जमीन को नुकसान पहुंचाने नहीं देगी।

(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

 

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