दूषित पानी से हुई मौतों के बाद, हाई कोर्ट ने अतिरिक्त पानी के टैंकर सप्लाई का आदेश दिया

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने नगर निगम को अतिरिक्त पानी के टैंकर सप्लाई करने का आदेश दिया।

जस्टिस द्वारकाधीश बंसल और राजेंद्र कुमार वाणी की डिवीजन बेंच ने निगम और राज्य सरकार को नियमित रूप से साफ पानी सप्लाई करने और प्रभावित लोगों को तुरंत सबसे अच्छा इलाज देने का भी आदेश दिया।

जस्टिस बंसल ने टिप्पणी की, “यह बड़ी खबर है। अगर लोग पानी की वजह से मर रहे हैं, तो यह गलत है… इंदौर की सुंदरता बनाए रखें।” 

सुनवाई के दौरान, वकील मोहन सिंह चंदेल ने दावा किया कि उन्होंने उस जगह का दौरा किया था और निवासियों को साफ पीने का पानी नहीं मिल रहा था।

इंदौर नगर निगम ने दावा किया कि उसने पहले ही 30 पानी के टैंकर भेज दिए हैं।

जस्टिस बंसल ने कहा”मैं चाहता हूं कि आप अतिरिक्त पानी के टैंकर भेजें और वकील को तस्वीरें भेजें… हमें 10 मिनट के भीतर टैंकर भेजने चाहिए… कलेक्टर, एसडीएम, जिसे भी आप बुलाना चाहें, पानी के टैंकर पहुंचने चाहिए।” निगम ने कहा कि वह तुरंत चार और पानी के टैंकर भेजेंगे।

दरअसल, 26 दिसंबर से दूषित पीने का पानी पीने के बाद 1,400 से ज़्यादा लोग बीमार पड़ गए हैं। 200 से ज़्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रिपोर्टों के अनुसार दूषित पानी के कारण 14 मौतें हो चुकी हैं।

इस बीच, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इंदौर में दूषित पानी के कारण कई लोगों की मौत को लेकर शुक्रवार को आरोप लगाया कि भाजपा शासित मध्य प्रदेश कुप्रशासन का केंद्र बन चुका है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गरीबों की मौत पर हमेशा की तरह खामोश हैं। उन्होंने यह आरोप लगाया कि जीवन के अधिकार की ‘‘हत्या” के लिए भाजपा का ‘‘डबल इंजन” जिम्मेदार है।

राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘इंदौर में पानी नहीं, ज़हर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं और ऊपर से भाजपा नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी; सरकार ने घमंड परोस दिया।” उन्होंने सवाल किया कि लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की तो फिर सुनवाई क्यों नहीं हुई?

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘‘सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते आपूर्ति बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी?” उन्होंने कहा, ‘‘ये ‘फोकट’ सवाल नहीं, ये जवाबदेही की मांग है। साफ पानी एहसान नहीं, जीवन का अधिकार है। और इस अधिकार की हत्या के लिए भाजपा का डबल इंजन, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह ज़िम्मेदार है।”

उल्लेखनीय है कि एनडीटीवी के रिपोर्टर अनुराग द्वारी के एक सवाल पर कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था फोकट का सवाल मत पूछो। उन्होंने “घंटा” शब्द का भी इस्तेमाल किया जिस पर रिपोर्टर ने उन्हें खरी-खोटी भी सुनायी। बाद में वह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो जाने के कारण विजयवर्गीय ने खेद भी प्रकट किया।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)

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