3 जनवरी को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में झारखंड जनाधिकार महासभा, भाकपा माले एवं मुण्डा सभा द्वारा मरांङ गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 123वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर श्रद्धांजलि सभा और विचार विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य संविधान निर्माण में उनके योगदान तथा आदिवासी अधिकारों के लिए किए गए उनके ऐतिहासिक संघर्ष को स्मरण करना था।
कार्यक्रम प्रातः 10:30 बजे प्रारंभ हुआ, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, युवा एवं विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर जयपाल सिंह मुंडा के विचारों, विशेष रूप से आदिवासी समाज और लोकतंत्र पर उनके दृष्टिकोण पर चर्चा की गई।
झारखंड जनाधिकार महासभा के टॉम कावला, मुंडा सभा से बिलकन डांग, पी एस सांगा, एवं भाकपा माले से राम नरेश जी ने अपनी बातें रखीं और उनके जीवन पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर वक्ताओं ने बताया कि मरांङ गोमके जयपाल सिंह मुंडा आधुनिक भारत के उन महान नेताओं में से थे जिन्होंने आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और उनके हक अधिकारों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से प्रस्तुत किया। वे एक प्रख्यात शिक्षाविद्, कुशल खिलाड़ी (ओलंपियन हॉकी कप्तान), संविधान सभा के सदस्य तथा आदिवासी राजनीति के अग्रदूत थे। उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।
संविधान सभा में जयपाल सिंह मुंडा ने आदिवासियों के जल, जंगल और ज़मीन के अधिकारों, उनकी सांस्कृतिक पहचान और स्वशासन की परंपराओं की प्रभावी वकालत की। वे झारखंड राज्य की अवधारणा के प्रमुख सूत्रधारों में से एक रहे और जीवनभर आदिवासी समाज की आवाज़ बने रहे।
यह कार्यक्रम न केवल श्रद्धांजलि, बल्कि उनके सपनों के झारखंड और समानता पर आधारित भारत के निर्माण के संकल्प को दोहराने का अवसर भी रहा।
इस कार्यक्रम में महासभा से टॉम कावला, एलिना होरो, लीना पदम, अलका आईंद, आकांक्षा बिहान, मनोज तिरु, एवं मुंडा सभा से बिलकन डांग, पी एस सांगा, तनूजा मुण्डा,सोसन समद, माले से राम नरेश सिंह, सुदामा खलखो एवं कई अन्य मौजूद रहे।
बता दें कि कि जयपाल सिंह मुंडा का जन्म 03 जनवरी 1903 को हुआ और 20 मार्च 1970 को वे दुनिया से विदा हो गए।
(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)