लखनऊ। अति पिछड़े वर्ग को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण देने, कोल को जनजाति का दर्जा देने के लिए भारत सरकार को संस्तुति भेजने और दलित, आदिवासी, अति पिछड़े, पसमांदा मुसलमान व महिलाओं के विकास के लिए अलग बजट आवंटन करने की मांग पर रोजगार और सामाजिक अधिकार अभियान की तरफ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा गया है।
ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष एस. आर. दारापुरी, राष्ट्र उदय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह अभियान के संयोजक बाबूराम पाल, पूर्व एमएलसी अरविंद सिंह, भारतीय मानव समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामधनी बिंद, राष्ट्रीय भागीदारी पार्टी के अध्यक्ष मंडल सदस्य श्रीकांत साहू, अति पिछड़ा अधिकार मंच के संयोजक जवाहरलाल पाल एडवोकेट, मजदूर किसान यूनियन पार्टी के अध्यक्ष सुक्रम पाल कश्यप और महापदनंद संगठन के उपाध्यक्ष इंद्रजीत शर्मा की तरफ से इस पत्र को भेजा गया है।
पत्र में कहा गया है कि प्रदेश में अति पिछड़े समाज का शासन, प्रशासन और सत्ता में उनकी संख्या के सापेक्ष वाजिब प्रतिनिधित्व नहीं है। यह सच प्रदेश में तमाम रिपोर्टों में सामने आया है। प्रदेश सरकार उनके लिए अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में से अलग आरक्षण कोटा दे सकती है। इस बात की इजाजत संविधान और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न आदेश देते हैं। इसलिए प्रदेश सरकार को आसन्न त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अति पिछड़े वर्ग के लिए सीट आरक्षित करने का आदेश तत्काल देना चाहिए।
पत्र में कहा गया कि प्रदेश में लाखों की आबादी कोल आदिवासी जाति की है। जिसे केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होने के बावजूद अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल नहीं किया गया। परिणामस्वरूप उन्हें वनाधिकार कानून का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यदि कोल को जनजाति का दर्जा मिल जाए तो आदिवासी समाज के लिए लोकसभा की एक सीट भी आरक्षित हो जायेगी।
इसलिए मांग की गई कि एक बार फिर से प्रदेश सरकार जनजाति कार्य मंत्रालय भारत सरकार को कोल को जनजाति की सूची में शामिल करने के लिए पत्र भेजे और हर स्तर पर प्रयास करे।
पत्र में दलित, आदिवासी, अति पिछड़े, पसमांदा मुसलमान और महिलाओं, जो आर्थिक ढांचे में बहिष्कृत कर दिए गए हैं, के विकास के लिए अलग बजट आवंटन की मांग भी की गई।
(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)