नई दिल्ली। चुनावों में गड़बड़ी की आशंका बहुत दिनों से जतायी जा रही है। उसमें वोटर लिस्ट में बदलाव से लेकर वोट चोरी समेत दर्जनों तरीके अपनाये जाने की बात की जा रही है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर पूरे सबूतों के साथ वोट चोरी के कई मामले देश के सामने पेश किया है। और उनसे जुड़े ढेर सारे सवाल चुनाव आयोग से पूछे हैं लेकिन आयोग उनका कोई जवाब नहीं दे सका है। इन्हीं तरीकों में एक तरीका ईवीएम मैनिपुलेशन का भी रहा है। इसीलिए विपक्ष बार-बार सरकार और चुनाव आयोग से बैलेट पेपर पर चुनाव कराने की मांग करता रहा है।
हाल में हुए महाराष्ट्र के नगर निगम के चुनावों में भी इसी तरह की आशंका जताई जा रही है। मतदान के दिन विपक्षी नेताओं ने वोटिंग के बाद मतदाताओं की अंगुली में लगायी जाने वाली स्याही की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़ा कर दिया था। विपक्ष का आरोप था कि वह स्याही किसी सामान्य डिटॉल या फिर लिक्विड से आसानी से मिटायी जा सकती है। और ऐसा उन्होंने मीडिया के सामने करके भी दिखाया। इस बीच जबकि चुनाव हो गए हैं और नतीजे भी आ गए हैं तो कुछ मामले ऐसे सामने आ रहे हैं जिनमें ईवीएम में छेड़छाड़ और सत्ता पक्ष के प्रत्याशियों के पक्ष में उनके इस्तेमाल की भी आशंकाएं जाहिर की जा रही हैं।
इसी तरह का एक मामला मुंबई के दहिसर ईस्ट वार्ड का सामने आया है। इस वार्ड में कुल चार प्रत्याशी खड़े थे। जिनमें तीन राजनीतिक दलों से जुड़े थे और एक निर्दलीय था। राजनीतिक दलों में शिवसेना (यूटीबी), बीजेपी और कांग्रेस के प्रत्याशी थे। शिवसेना (यूटीबी) से धनश्री विलास कोलगे, बीजेपी से तेजस्वी अभिषेक घोसालकर जबकि कांग्रेस से सिंह मेनका गिरीश शामिल थीं। यहां बीजेपी की प्रत्याशी विजयी रही हैं। जबकि शिवसेना यूटीबी दूसरे नंबर पर आयी है। मतदान के बाद विभिन्न बूथों से इनके पड़े वोटों में कुछ ऐसी चीजें देखने को मिल रही हैं जो किसी भी रूप में सामान्य नहीं दिखती हैं।

मसलन कांग्रेस की प्रत्याशी मेनका गिरीश को कई बूथों पर एक ही अंक के वोट मिले हैं। जैसे बूथ नंबर एक पर उन्हें 15 मत हासिल हुए हैं। इसी तरह से बूथ नंबर 8, बूथ नंबर 13, बूथ नंबर 25, बूथ नंबर 28 और बूथ नंबर 30 पर भी उन्हें 15-15 मत प्राप्त हुए हैं। यानि इस तरह से उन्हें 6 बूथों पर 15-15 वोट मिले हैं। इसी तरह से कई बूथों पर उन्हें 16-16 मत हासिल हुए हैं। इनका बूथ नंबर क्रमश: 9, 23, 32, 33 और 34 हैं। इस तरह से पांच बूथों पर उन्हें 16-16 मत मिले हैं। अब यह संयोग है या प्रयोग इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि 15 और 16 के अलावा कोई दूसरी संख्या ऐसी नहीं है जो इतनी बार दोहरायी गयी हो। अगर इनमें कोई साम्यता होती तो दूसरी संख्याएं भी इसी तरह से दोहरायी जातीं।

इसी तरह से विजयी प्रत्याशी तेजस्वी को मिले वोटों के पैटर्न में भी कुछ ऐसा ही दिखता है। मसलन 499 एक ऐसी डिजिट है जो कई बार दोहरायी गयी है। बूथ नंबर 3 पर उन्हें 499 वोट मिले हैं। फिर 24 और 25 पर भी उन्हें इतनी ही डिजिट में यानी 499 मिले हैं। जबकि बाकी दो प्रत्याशियों में कोई ऐसी संख्या नहीं है जो इतनी बार दोहरायी गयी हो। अब अगर यह सामान्य पैटर्न होता तो बाकी प्रत्याशियों को मिले मतों में भी दिखना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आखिर इसके पीछे क्या वजह हो सकती है? यह एक बड़ा सवाल बन जाता है और इस तरह से जांच के दायरे में भी आ जाता है। यहां इस बात की पूरी आशंका है कि जीतने वाले प्रत्याशी और सत्ता द्वारा जिसे सबसे ज्यादा निशाने पर लिया जाना था उसके मतों के साथ छेड़छाड़ की गयी हो।
(जनचौक की रिपोर्ट।)