नयी दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग करने वाले कथित धर्मगुरु बाबा बागेश्वर के कार्यक्रम में भारतीय सेना के जवानों के अपनी वर्दी में शामिल होने और उसके वीडियो को सेना के अधिकृत हैंडल से पोस्ट किए जाने को सेना के राजनीतिकरण की साज़िश का हिस्सा बताया है। उन्होंने भारतीय सेना प्रमुख से इस संविधान विरोधी कृत्य में शामिल जवानों के कोर्ट मार्शल करने की मांग की है।
शाहनवाज़ आलम ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि भारतीय सेना हमेशा से ही धर्मनिरपेक्ष और राजनीतिक प्रभाव से दूर एक स्वतंत्र संस्था रही है। उसके कोड ऑफ़ कंडक्ट के अनुसार सैनिक का कोई निजी मजहब नहीं होता। उसके लिए वर्दी धारण करने के बाद धार्मिक प्रतीकों का प्रदर्शन वर्जित है। इसलिए बागेश्वर बाबा के कार्यक्रम में सैनिकों की वर्दी में मौजूदगी सेना के अनुशासन का उल्लंघन और देश के लिए ख़तरा है। जिसपर कठोर कार्रवाई करना सेना प्रमुख की ज़िम्मेदारी है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि भारतीय सेना में आरएसएस और अन्य चरमपंथी हिंदुत्ववादी संगठनों से जुड़े लोगों की घुसपैठ देश के सामने पहले भी सुरक्षा का संकट पैदा कर चुकी है। देश ने देखा है कि कैसे अभिनव भारत जैसे चरमपंथी संगठनों से जुड़े सैन्यकर्मियों का नाम मालेगांव, सद्भावना एक्सप्रेस और हैदराबाद के मक्का मस्जिद पर हुए आतंकी हमलों में आया था। वहीं अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय कश्मीर के छत्तीसिंहपोरा नरसंहार में भी इन तत्वों की भूमिका उजागर हुई थी।
शाहनवाज़ आलम ने मोदी सरकार पर सेना की धर्मनिरपेक्ष छवि को बिगाड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना अतीत में अपने अभियानों को हमेशा ग़ैर धार्मिक नाम देती आई है। जैसे- ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन तलवार, ऑपरेशन पराक्रम, ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन पवन, ऑपरेशन स्विफ्ट रिटोर्ट। लेकिन पहलगाम की घटना के बाद अचानक से मोदी सरकार ने पाकिस्तान की नकल करते हुए अपने अभियानों को ‘सिंदूर’ जैसा हिंदू धार्मिक पहचान वाला नाम दे दिया।
जिसके तहत दो और धार्मिक नाम ऑपरेशन महादेव, ऑपरेशन शिव शक्ति और सुरक्षा कवच अभियान को सुदर्शन चक्र नाम दे दिया। जिसका मकसद सेना के धर्म निरपेक्ष चरित्र को बदलकर हिंदुत्ववादी रंग देना था। ताकि दो राष्ट्रों के बीच का संघर्ष दो धर्मों के बीच के संघर्ष में बदल जाए।
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि यह पूरा षड्यंत्र भारत को हिंदू पाकिस्तान बनाने के आरएसएस की योजना का हिस्सा है। क्योंकि पाकिस्तान भी अपने भारत विरोधी सैन्य अभियानों का नाम ऑपरेशन चंगेज़ ख़ान, ऑपरेशन जिब्राल्टर, बुनियान – उन – मार्सूस जैसे इस्लामिक नामों पर रखता है। इसके अलावा वो अपनी मिसाइलों का नाम ग़ज़नी और तैमूर रखकर अपनी जनता को इन पश्चिमी देशों के इशारों पर होने वाली लड़ाइयों को हिंदुओं के ख़िलाफ़ युद्ध के बतौर पेश करता है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के सेना के सांप्रदायीकरण के प्रयासों को राजनीतिक दलों और नागरिक समाज को खुलकर विरोध करना चाहिए।
(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)