एपस्टीन फाइल से जुड़ी महिला की तलाश ने सरकार की थू-थू कराई         

 

हमारे देश में यूं तो देवी तुल्य माने जाने की परम्परा है जन्म होने पर भले ही परिवार पर ग़म का साया छा जाता हो किंतु उसे लक्ष्मी की संज्ञा दी जाती है ग़म मिटाने के लिए। उसे लेकर परिजनों की जो सोच होती थी कि ये पराया धन है इसलिए उसके साथ सौतेला व्यवहार भी होता था। आज़ादी के पहले से सावित्री बाई फुले और फातिमा शेख ने स्त्री शिक्षा के लिए कदम बढ़ाए। बाद में आज़ादी के बाद जब उन्हें बराबरी का अधिकार मिला तो उन्होंने पढ़ना तेजी से प्रारंभ किया। कुछ सरकारी योजनाओं से भी उनको मदद मिली। वर्तमान स्थिति में वे पुरुषों से आगे निकल आई हैं।

लेकिन ज्यों ही उनका हर क्षेत्र में आगे बढ़ना हुआ हर जगह उनके शारीरिक शोषण की ख़बरें मिलनी शुरू हो गईं। जैसे पुरुषों के लिए वो खतरा बन गई हों। उनकी बढ़ती ताकत देख अब एक पुरुष नहीं बल्कि सामूहिक बलात्कार के मामले बढ़ने लगे। राजधानी दिल्ली का निर्भया कांड आत्मा हिला देने वाला था। तब नया कानून बनाया गया जिससे बचने के लिए यौन शोषकों ने अब अपना ट्रेंड बदल दिया है वे यौन पीड़िता की जान लेने लगे। ताकि पीड़िता गवाही के अभाव में वे सुरक्षित रह सकें।

आखिरकार महिलाएं वर्तमान दौर में पुरुषवादी सोच से कमज़ोर हुई हैं क्योंकि जब शोषणकारी नेता, अधिकारी, कथित संत शिरोमणि, प्रवचनकार और दबंग हो तो न्याय मुनासिब नहीं रहा। बिल्किस बानो से लेकर अंकिता भंडारी जैसी अनगिनत महिलाओं के अपराधी या तो पकड़े नहीं गए या उनके पकड़े जाने पर सरकार की कृपा बरसती रही। बिहार की नीट छात्रा की बलात्कारियों द्वारा हत्या हाल में ऐसे ही सवालों से जूझ रहा है। महिला शोषण बढ़ा है।

उधर राजधानी दिल्ली और अन्य प्रदेशों से लड़कियों के बड़ी मात्रा में लापता होने की खबर ने सबको चौंका दिया है। तब और चिंता बढ़ गई है जब एक भारतीय लड़की जो एपस्टीन फाइल से जुड़ी थी वहां से भारत वापस आ गई थी। ये ख़बर अमेरिकी अदालत से मिलती है जिसको मुआवजा मिलने का आदेश हुआ है। वह उसे तलाश रही है।

यानि अब यह भी सामने आ गया है कि भारतीय लड़कियों को भी एपस्टीन के हवाले हमारे अपने लोगों ने ही किया है। मानसी सोनी और साहेब जी के रोमांस की कहानी भी अमेरिका तक पहुंची हुई है। विदित हो उसे भारत में बदनामी के डर से अमेरिका में भेज दिया गया था। वह कहां है यह भी खोज का विषय है।

बहरहाल ये भारतीय लड़की वहां कैसे पहुंची वह भी सीधे भारत सरकार पर सवाल है तथा सरकार को कटघरे में खड़ा करता है।

कुछ लोगों का ख्याल है कि जब जब मोदी जी का अमेरिका आना होता था तो उनके साथ में मोदी-मोदी कहने वालों को जहाज में भर के ले जाया जाता था। कहीं वहीं से भक्त लड़कियों की खास सेवाएं डोनाल्ड ट्रंप को देने में तो नहीं हुआ।अब यह तो तय है जो लड़की एपस्टीन फाइल में शामिल है वह ज़िंदा है भी या नहीं। क्योंकि उसकी जानकारी भारत सरकार को होगी ही। उसे शायद ही अब तक ज़िंदा रखा गया होगा।

अमेरिका की अदालत यदि मुआवजे के लिए उसकी तलाश नहीं करती तो हमें पता भी नहीं चलता कि इस राक्षसी शोषण में भारतीय महिलाओं का भी इस्तेमाल हुआ है।

यह भारत सरकार पर गंभीर मामला बनता है। डूब मरना चाहिए प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री को। इसका जवाब देना ही होगा वरना अमेरिकी अदालत तो सच सामने लाएगी ही। सलाम है, अमरीकी अदालत को जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लपेटा हुआ। मोदी जी को दोस्ती का यह सिला बहुत महंगा पड़ने वाला है।

भारतीय महिलाओं के साथ किया गया अत्यंत गंभीर और शर्मनाक मामला है।क्या महिलाएं इस भारी बेइज्जती का भी प्रतिकार करने का साहस कर पाएंगी और सुप्रीम कोर्ट भी क्या इस मामले को स्वत: संज्ञान में लेकर अपनी प्रतिष्ठा कायम रखेगा।

(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)

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