शंकराचार्य की गिरफ़्तारी पर अंतरिम रोक, अग्रिम ज़मानत पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य को पाक्सो केस में अंतरिम राहत दी और फिलहाल उनकी गिरफ़्तारी पर रोक लगाई। उनकी अग्रिम ज़मानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखते हुए जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच ने निर्देश दिया कि आवेदकों को अग्रिम ज़मानत अर्जी के आखिरी निपटारे तक गिरफ़्तार नहीं किया जाएगा। हालांकि, बेंच ने उनसे जांच में सहयोग करने को कहा।

कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत अर्जी पर आदेश सुरक्षित करते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने शुक्रवार शाम लगभग एक घंटे से अधिक समय तक चली सुनवाई के बाद दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि पक्षकारों के अधिवक्ता 12 मार्च तक लिखित प्रस्तुतियां और मामले के कानूनी नज़ीरें दाखिल कर सकते हैं। कोर्ट ने याचियों के अधिवक्ता को आशुतोष ब्रह्मचारी के पूरक शपथ पत्र की कॉपी प्रदान करने का निर्देश भी दिया है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर हाल ही में हुए माघ मेले के दौरान नाबालिगों के कथित यौन शोषण को लेकर पाक्सो एक्ट  और बीएनएस के तहत गंभीर आरोप हैं।

एफआईआर  शनिवार रात (21 फरवरी) को प्रयागराज के झूंसी पुलिस स्टेशन में 23:37 बजे दर्ज की गई, प्रयागराज में एक स्पेशल पाक्सो  कोर्ट द्वारा संबंधित थाना प्रभारी  को ‘तुरंत’ मामला दर्ज करने का निर्देश जारी करने के कुछ ही घंटे बाद।

एफआईआर  में पाक्सो एक्ट  के तहत गंभीर प्रावधानों का इस्तेमाल किया गया, जिसमें धारा 3, 5l, 4(2), 6, 16, 17, और 51 शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि धारा 5l r/w धारा 6 किसी बच्चे पर गंभीर पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट की सज़ा से जुड़ा है, जिसके लिए सज़ा कम से कम 20 साल की सज़ा है, जिसे उम्रकैद तक बढ़ाया जा सकता है।

आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज नाम के एक व्यक्ति ने स्पेशल जज से संपर्क किया, जब लोकल पुलिस अधिकारियों ने स्टेशन हाउस ऑफिसर और पुलिस कमिश्नर को की गई दुर्व्यवहार के बारे में शुरुआती लिखित शिकायतों पर कथित तौर पर कार्रवाई नहीं की थी। उनकी अर्जी में आरोप लगाया गया कि दो नाबालिगों (विक्टिम ‘A’, उम्र लगभग 14 साल और विक्टिम ‘B’, उम्र लगभग 17 साल और 6 महीने) का प्रयागराज में माघ मेले, 2025-26 के दौरान आरोपियों ने यौन शोषण किया। आरोप है कि जिन कामों की शिकायत की गई, वे धार्मिक सेवा और शिष्यत्व की आड़ में किए गए।

सुनवाई के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से आरोपों को गलत बताते हुए कहा गया कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। यह भी दलील दी गई कि वादी आशुतोष का खुद का अपराधिक इतिहास है। राज्य सरकार की ओर से अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध किया गया। अर्जी सीधे हाईकोर्ट में दाखिल करने और उसकी पोषणीयता पर भी सवाल उठाया गया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित कर लिया और अविमुक्तेश्वरानंद व मुकुंदानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। साथ ही मामले की जांच जारी रखने और अविमुक्तेश्वरानंद व मुकुंदानंद को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया।

गौरतलब है कि आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर प्रयागराज के विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) के आदेश के क्रम में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व अन्य के खिलाफ बीते रविवार को झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। झूंसी पुलिस ने मुकदमा दर्ज होने के बाद इस मामले में तफ्तीश शुरू कर दी है। पुलिस ने पीड़ितों का बयान लिया है और मेडिकल भी कराया है। इधर, फैसला आते ही वाराणसी स्थित मठ में अनुयायी खुशियां मनाने लगे। वहीं, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बटुकों के साथ होली खेली।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद शंकराचार्य ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। कहा है कि शंकराचार्य नाम की संस्था को बदनाम करने के लिए साजिश रची गई थी। न्यायालय ने आदेश के बाद इन सब चीजों को खत्म कर दिया है। सांच को आंच नहीं होती, झूठ की ताकत होती है, लेकिन सच की उससे ज्यादा होती है। झूठ की ताकत परेशान करने के लिए होती है जबकि सच की ताकत पराजित करने की होती है। हमें मालूम था कि झूठ अपना काम करेगा और परेशान करेगा, लेकिन उसकी उम्र ज्यादा नहीं होगी। कहा कि जो भी बातें जनता के बीच में खड़े होकर कहीं गई हैं, आज उन बातों की पोल खुल गई है, कलई खुल चुकी है। कहा कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने जो कुछ भी कहा है या जो भी किया है, वह देखा जाएगा। रंगभरी एकादशी का त्यौहार है, हम उस उत्सव को मनाएंगे।

यह हमने देखा है और यह भी देखते रहे कि किसके मन में क्या है। क्योंकि बहुत से लोगों के मन की बात हमें इस दौरान पता चल गई हैं। बहुत कुछ साफ हो गया है, बहुत अच्छा रहा, जो हुआ। शंकराचार्य ने कहा कि यह जीत बड़ी छोटी नहीं, सत्य की जीत है। न्यायालय ने कहा कि हम विस्तृत ऑर्डर बाद में जारी करेंगे, अभी की बात यह है कि गिरफ्तारी पर रोक रहेगी। जिसने भी आरोप लगाया था, उनको संदेश मिल चुका है।

दूसरी ओर वाराणसी स्थित शंकराचार्य के आश्रम में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गिरफ्तारी पर रोग लगने के बाद गुजरात से आई महिलाओं ने जमकर गरबा किया और अपनी खुशी जाहिर की। बोलीं कि हम बहुत खुश हैं, हमारे गुरुजी ने सत्य की जीत सुनिश्चित की।

प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज एफआईआर के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद को साजिश का शिकार बताते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। याचिका में उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाए गए और सोशल मीडिया व सार्वजनिक मंचों पर उनकी छवि खराब करने के लिए इस्तेमाल किया गया।

(जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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