सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गहरा दुख जताया कि पेपर लीक होने की वजह से नीट-यूजी 2026 को रद्द करना पड़ा। कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि दो साल पहले, 2024 में पेपर लीक के संबंध में कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के बावजूद, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने कोई सबक नहीं सीखा।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने एनटीए को निर्देश दिया कि वह 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों और सिफारिशों पर अब तक उठाए गए कदमों का विस्तृत हलफनामा गुरुवार तक दाखिल करे।
कोर्ट ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टूडेंट्स द्वारा एनटीए को बदलने की मांग वाली याचिकाओं पर नोटिस जारी किया, और एनटीए से उस हाई-पावर्ड कमेटी (उच्च-स्तरीय समिति) की सिफारिशों के अनुसार उठाए गए कदमों पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी। इस कमेटी का गठन कोर्ट के 2024 के फैसले के अनुसार, नीट व्यवस्था को मज़बूत करने के उपाय सुझाने के लिए किया गया था।
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि सभी याचिकाओं की कॉपी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को दी जाए। याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील तन्वी दुबे पेश हुईं।
जस्टिस नरसिम्हा ने मौखिक रूप से टिप्पणी की: “हमें बहुत दुख है, उन्होंने (एनटीए) कोई सबक नहीं सीखा। हमने आदेश पारित किया था, जिसमें सिफारिशें देने के लिए एक समिति के गठन का निर्देश दिया गया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया था।”
“हम एनटीए को एक हलफनामा दायर करने का निर्देश देते हैं, जिसमें 14 नवंबर, 2024 को गठित निगरानी समिति के संबंध में स्थिति स्पष्ट की जाए। हम पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन को भी हलफनामा दायर करने का निर्देश देते हैं, जिसमें हाई-पावर्ड कमेटी द्वारा दी गई सिफारिशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख हो; इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। यह हलफनामा 3 दिनों के भीतर दायर किया जाना चाहिए।”
2024 के नीट-यूजी पेपर लीक की पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार द्वारा इस उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया गया था। इसकी अध्यक्षता इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन ने की थी। 2024 में ‘वंशिका यादव बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा रद्द करने से इनकार किया था, लेकिन कोर्ट ने पेपर लीक से निपटने के लिए कई निर्देश जारी किए। साथ ही सार्वजनिक परीक्षाओं को रद्द करने के लिए एक मानदंड भी निर्धारित किया था।
कोर्ट ने डॉ. राधाकृष्णन समिति के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किया और समिति को परीक्षा सुरक्षा, पेपरों के परिवहन, सीसीटीवी निगरानी, उम्मीदवारों के सत्यापन, एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल, तकनीकी सुरक्षा उपायों, रियल-टाइम निगरानी, शिकायत निवारण और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं पर सुधारों की सिफारिश करने का निर्देश दिया।
केंद्र सरकार ने 17 दिसंबर, 2024 को रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें विशेषज्ञों की उच्च-स्तरीय समिति की सिफारिशों के बाद उठाए गए कदमों का विस्तृत विवरण दिया गया था।
अनुपालन रिपोर्ट के अनुसार, एचएलसीई ने “राष्ट्रीय सामान्य प्रवेश परीक्षा प्रणाली में सुधार” की सिफारिश की, जिसमें एनटीए को मजबूत करना, राज्यों के साथ संस्थागत समन्वय और विशेष परीक्षा तथा ज्ञान भागीदारों को शामिल करना शामिल है।
याचिकाएं नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने की पृष्ठभूमि में दायर की गई थीं। यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट द्वारा दायर याचिका में नीट-यूजी 2026 परीक्षा आयोजित करने में एनटीए की “प्रणालीगत विफलता” को देखते हुए एनटीए को भंग करने की मांग की गई। इसमें कहा गया कि परीक्षा में करीब 23 लाख छात्र शामिल हुए थे।
(जनचौक ब्यूरो)