नेहरू प्रेम और मोदी घृणा और नफरत के प्रतीक

1- नेहरू  प्रेम, करुणा, अहिंसा और शांति के प्रचारक थे। 

 नरेंद्र मोदी नफरत, घृणा, हिंसा और अशांति के प्रचारक हैं।

2- नेहरू के जीवन के केंद्र में राष्ट्र प्रेम और पूरी मानव जाति थी। वे खुद को यूनिवर्स का केंद्र नहीं समझते थे। 

नरेंद्र मोदी सिर्फ खुद को ही को प्रेम करते हैं, आत्म मुग्ध व्यक्ति हैं। वे खुद को यूनिवर्स का केंद्र समझते हैं। राष्ट्र-देश उनके लिए अपनी छवि चमकाने का माध्यम भर है।

3- नेहरू भारत और पूरी दुनिया में प्रगति और उन्नति के लिए काम करते थे। 

नरेंद्र मोदी व्यक्तिगत उन्नति और प्रगति को सब कुछ समझते हैं। सारा जोर हर हालात में प्रधानमंत्री बने रहने पर है। 

4- नेहरू दार्शनिक और चिंतक थे। वे तर्क, विज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टि के प्रचारक थे।

नरेंद्र मोदी एक मूढ़ व्यक्ति हैं। वे आर्तिककता, अवैज्ञानिकता और मूर्खता के प्रचारक हैं।

5- नेहरू के विचारों और व्यवहार में साम्य है। वे पाखंड़ी नहीं थे। 

नरेंद्र मोदी एक पाखंड़ी व्यक्ति हैं। वे कहते और बोलते कुछ और हैं, और करते कुछ और हैं।

6- नेहरू लोकतांत्रिक मानस के व्यक्ति थे। वे असहमति और विरोध का सम्मान करते थे। 

नरेंद्र मोदी अलोकतांत्रिक मानस के एक तानाशाह व्यक्ति हैं। वे असहमति और विरोध को हर समय और हर स्तर पर कुचल देते हैं या कुचल देना चाहते हैं।

7- नेहरू को बराबरी पर खड़ा होने वाले, बराबरी के आधार पर संबंध बनाने वाले और बराबरी के आधार बात करने वाले व्यक्ति पसंद थे। 

नरेंद्र मोदी चापलूसी और जी हुजूरी पसंद करते हैं। उन्हें चापलूस और जी हुजूर पसंद हैं।

8- नेहरू ने इस देश में लोकतंत्र की मजबूत नींव डाली थी। 

नरेंद्र मोदी ने इस देश में लोकतंत्र की जड़ों को उखाड़ देने की हर कोशिश की है और उसमें सफल भी हुए हैं।

9- नेहरू भारत की एकता, अखंडता और उन्नति एवं प्रगति के लिए भारत की विविधता की स्वीकृति और सम्मान को अनिवार्य चीज मानते थे। 

नरेंद्र मोदी पूरे भारत को एक रंग में रगने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, वह रंग हिंदी पट्टी के हिंदुत्व का रंग है। वे भारत की विविधता और बहु धार्मिक- सांस्कृतिक स्वरूप को मिटा देना चाहते हैं, जबकि नेहरू भारत की विविधता और बहु सांस्कृतिक-धार्मिक स्वरूप को भारत की शक्ति और संभावना के रूप में देखते थे।

10- नेहरू भारत के संघीय ढांचे को भारत की एकता-अखंडता और विविधता की स्वीकृति के जरूरी मानते थे।

नरेंद्र मोदी भारत के संघीय ढांचे को तोड़ रहे हैं और  बचे-खुचे को तोड़ने की योजना बना रहे हैं।

11- नेहरू ने इस देश में उच्च स्तरीय वैज्ञानिक-तकनीकी  और शैक्षिक संस्थाओं की नींव डाली। 

इसके बरक्स नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि राम मंदिर का निर्माण है।

12- नेहरू ने इस देश में सांप्रदायिक दंगों और हिंसा को खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास किया। 

नरेंद्र मोदी साम्प्रदायिक दंगों और हिंसा को अपने लिए संजीवनी बूटी मानते हैं। चुनावी सफलता की सबसे बड़ी गारंटी।

13- नेहरू ने भारत की संप्रभुता और आज़ादी की हमेशा रक्षा की। उन्होंने दुनिया की बड़ी से बड़ी शक्ति के सामने भारत की आजादी और संप्रभुता का कभी सौदा नहीं किया। वे किसी भी साम्राज्यवादी शक्ति के सामने नतमस्तक नहीं हुए और न ही देश का सिर झुकने दिया।

नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के सामने भारत की संप्रभुता को अपने और कार्पोरेटे मित्रों के स्वार्थ में बेंच डाला। वे डोनाल्ड ट्रंप के सामने पूरी तरह नतमस्तक हो गए। देश और देश वासियों की गरिमा को शर्मसार कर दिया। 

14- नेहरू के सामने भारतीय पूंजीपति झुकते थे। वे भारतीय पूंजीपतियों के जर खऱीद गुलाम नहीं थे।

नरेंद्र मोदी भारतीय कार्पोरेट-पूंजीपतियों के धन-चंदे से प्रधानमंत्री बने और बने हुए हैं। वे भारत के चंद कार्पोरेट घरानों के जर-खरीद गुलाम हैं।

15-  भारत के संविधान को साकार रूप देने में संविधान सभा में नेहरू की अहम भूमिका थी। आजाद भारत के प्रधानमंत्री के रूप उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों-परंपराओं की नींव डाली।

नरेंद्र मोदी ने हर स्तर  पर संविधान, संवैधानिक संस्थाओं, संवैधानिक मूल्यों और परंपराओं को ध्वस्त किया है। पिछले 12 सालों में उन्होंने संविधान को गहरी चोट पहुंचाई है और संवैधानिक संस्थाओं को खत्म करने की हर कोशिश की है।

16- नेहरू ने देश की आजादी के लिए अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा कुर्बान कर दिया। उन्होंने अपने जीवन के कीमती समय 11 वर्ष ब्रिटिश साम्राज्य की जेलों में बिताया। उन्होंने सुख-सुविधाएं छोड़कर भारत  की आजादी के संघर्ष में हिस्सेदारी की। आजादी के बाद राष्ट्र के एक सेवक के रूप में देश की सेवा की ।

नरेंद्र मोदी ने गरीब के बेटे और चाय बेचने वाले का अभिनय/नाटक किया। जनता की सहानुभूति हासिल की, वोट हासिल किया। फिर सब कुछ को अडानी-अंबानी और मोहन भागवत के चरणों में समर्पित कर दिया। बदले में प्रधानमंत्री पद पर बने हुए हैं।

13- नेहरू की भाषा मुहब्बत, शालीनता, सहिष्णुता, संवाद और एकता कायम करने की भाषा थी।

नरेंद्र मोदी की भाषा नरफरती, हिंसक, असहिष्णु, आक्रामक और बांटने वाली है।

हालांकि नेहरू और नरेंद्र मोदी में तुलना का बिंदु नहीं है, इस बात के अलावा की दोनों भारत के प्रधानमंत्री बने और नरेंद्र मोदी ने नेहरू के प्रधानमंत्री के कार्यकाल के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। हालांकि यह भी एक झूठ और फरेब ही है। क्योंकि अगर 1952 के पहले के नेहरू के प्रधानमंत्रित्व काल को बीजेपी-संघ नहीं गिनते और मानते हैं। तो फिर उन्हें यह जरूर बताना चाहिए कि क्या वह सरदार बल्लभ भाई पटेल को भी देश का पहला गृहमंत्री और उप प्रधानमंत्री मानते हैं या नहीं? क्योंकि सरदार पटेल का 1950 में निधन हो गया था। वह तो 1952 का चुनाव भी नहीं देख सके थे। इसके साथ ही बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर को वह कानून मंत्री मानते हैं या नहीं? ये दोनों बड़े सवाल बन जाते हैं। और देश उनसे इनके उत्तर चाहता है।

(डॉ. सिद्धार्थ लेखक और पत्रकार हैं।)

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