झारखंड : बंद पड़ी खदान से कोयला निकालने गए चार युवकों की मौत

झारखण्ड के रामगढ़ के सीसीएल का अरगड्डा क्षेत्र में बंद पड़ी एक खदान से कोयला निकालने खदान के भीतर गए चार युवकों की जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण दम घुटने से मौत हो गई।

उल्लेखनीय है कि झारखण्ड के लगभग कोयलांचल क्षेत्र के बंद पड़ी खदानों से आसपास के कुछ लोग कोयला निकालते हैं और उसे साईकिल पर लादकर होटलों या घरों में जाकर बेचते हैं, जिससे उनके परिवार के भोजन की व्यवस्था हो पाती है। यह काम स्थानीय लोग करते हैं जिनके पास रोजगार का न तो कोई व्यवस्था है और न ही उनके पास खेती बाड़ी का कोई साधन। 

वहीं दूसरे क्षेत्र के कुछ मजदूर जो रोटी रोजगार की तलाश में अवैध कोयला कारोबारियों द्वारा लाए जाते हैं, तथा ये अवैध कोयला कारोबारी औने पौने मजदूरी देकर उनसे अवैध खनन करवाते हैं।

इस खनन के क्रम में कभी कभी कोई हादसा हो जाता है और लोगों की जान तक चली जाती है, इसी तरह की एक घटना पिछले 13 जून को सुबह सुबह हुई। चपरी टोंगी जंगल स्थित एक बंद पड़ी खदान में चार युवक जो कोयला निकलने के लिए खदान के भीतर गए थे, संभवत: ज़हरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी की वजह से बेहोश हो गए।सीसीएल प्रबंधन, पुलिस और माइंस रेस्क्यू टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर चारों युवकों को बाहर निकाला और गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गयी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहले दो युवक कोयला चुनने के लिए खदान के अंदर चले गए।

काफी देर तक जब वे बाहर नहीं लौटे तो बाहर खड़े उनके दो साथी उन्हें खोजने के लिए अंदर गए।

बताया जाता है कि अंदर जहरीली गैस का प्रभाव बढ़ने और ऑक्सीजन की मात्रा कम होने के कारण दोनों अचानक अचेत हो गए थे और जब उनके दो अन्य साथी उन्हें देखने गए तो वे भी गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गए।

सूचना मिलने पर सीसीएल अरगड्डा, सिरका और कुजू क्षेत्र के अधिकारी मौके पर पहुंचे। साथ ही रामगढ़ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी घटनास्थल का जायजा लिया। इसके बाद नई सराय से 14 सदस्यीय विशेष माइंस रेस्क्यू टीम को बुलाया गया।

रेस्क्यू अभियान के दौरान टीम के प्रशिक्षित सदस्य ऑक्सीजन उपकरण और सुरक्षा किट के साथ खदान के अंदर उतरे। जहरीली गैस और अंधेरे के बीच करीब एक घंटे तक चले कठिन अभियान के बाद चारों युवकों को बाहर निकाल लिया गया। रेस्क्यू टीम की तत्परता से चारों युवको को बाहर निकाला गया जो बेहोश थे।

अचेतावस्था में बाहर निकाले गए युवकों में ओबीसी के सिरका बुधबाजार क्षेत्र के आशीष सिंह घटवार (25 वर्ष) और किशोर रवानी (25 वर्ष) और आदिवासी समुदाय के छोटकी टोंगी निवासी देवकुमार बेदिया (25 वर्ष) और डब्ल्यू बेदिया (30 वर्ष) थे। 

चारो की प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए एक सदर अस्पताल रामगढ़ में भर्ती कराया गया। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 

देवकुमार बेदिया और डब्ल्यू बेदिया आपस में चचेरे भाई थे। आशीष सिंह घटवार व डब्लू बेदिया घर का इकलौता चिराग थे।

आशीष की शादी दो माह पहले हुई थी जबकि किशोर रवानी की अभी शादी नहीं हुई थी।

रेस्क्यू टीम के विकास कुमार ने बताया कि “संभवतः खदान के अंदर ऑक्सीजन की भारी कमी और जहरीली गैस के रिसाव के कारण मौत हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।”

बताते चलें कि अरगड्डा की बंद पड़ी बी-सीम भूमिगत खदान के निकट और काजू बगान के जंगल क्षेत्र में लगभग 40 फीट लंबी और 30 फीट गहरी खदान बनायी गयी है, जो खदान बंद होने के बाद आसपास के गांव के कुछ लोगों द्वारा कोयला निकालने के क्रम में हो गया है।

अरगड्डा क्षेत्र स्थित जिस खदान में हादसा हुआ, वह कुजू ओपी से लगभग 12 किलोमीटर दूर है। 

आश्चर्यजनक यह है कि यहां 40 फीट लंबी और 30 फीट गहरी अवैध खदान तैयार कर ली गयी, लेकिन न तो सीसीएल प्रबंधन को इसकी भनक लगी और न ही जिला प्रशासन को, जो संदेहास्पद है। ऐसा लगता है कि सीसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन अधिकारियों व कर्मियों को इसकी जानकारी हो लेकिन उनके द्वारा लापरवाही बरती गई क्योंकि इसके पहले इस तरह की और भी घटनाएं इन इलाकों में हो चुकी हैं। 

बता दें कि 5 जुलाई 2025 को सीसीएल कुजू क्षेत्र की करमा परियोजना की खुली खदान में चाल धंसने से चार लोगों की मौत हो गयी थी। वहीं मई 2025 को रजरप्पा क्षेत्र के भुचूंगडी स्थित अवैध खदान में लगी आग में एक व्यक्ति की मौत हो गयी थी।

बताना जरूरी हो जाता है कि जहां एक तरफ कुछ लोग इस तरह के खदान से कोयला निकालकर बाजार घरों व होटलों में बेचकर अपनी रोजी रोटी चलाते हैं वहीं कुछ लोग मात्र 200 से 250 रुपये की दिहाड़ी मजदूरी की खातिर अपनी जान की बाजी लगा रहे है। 

कहना ना होगा इस तरह के परिवार के लोग प्रायः ओबीसी, दलित व आदिवासी समुदाय के होते हैं।

सीसीएल की विभिन्न परियोजनाओं से प्रतिमाह हजारों टन कोयले का अवैध खनन होता है। बंद खदानों में अवैध सुरंगें बनाकर खुदाई की जाती है। ऐसी असुरक्षित सुरंगों के कारण अक्सर हादसे होते रहते हैं। इन सुरंगों के धंसने और गैस रिसाव जैसी घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। अवैध खनन में लगे मजदूरों को प्रतिदिन मात्र 200 से 250 रुपये मजदूरी दी जाती है। कई मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर इस काम में लगे हुए हैं।

सीसीएल के सीएमडी एनके सिंह कहते हैं – “रामगढ़ जिले के अरगड्डा में जो घटना हुई, वह दुखद है। जहां घटना हुई है, वह वन क्षेत्र है। इससे सीसीएल का कोई लेना-देना नहीं है। अभी सीसीएल ने इसका अधिग्रहण नहीं किया है। जिस जगह पर अवैध खनन हो रहा था, उसकी जिम्मेवारी वन विभाग की है। सीसीएल का जो दायित्व है, उसे पूरा कर रहा है।

बताते चलें कि झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य में अवैध माइनिंग को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सख्त आदेश पारित किया है। हाल ही में हजारीबाग के इचाक क्षेत्र और धनवा में अवैध खनन के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जतायी थी। कोर्ट ने अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए कई सख्त निर्देश जारी किये थे और ऐसी गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने को कह था। पर्यावरण और कृषि भूमि को हुए नुकसान के लिए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पर्यावरणीय मुआवजा वसूलने का आदेश दिया गया है। अवैध उत्खनन में शामिल लोगों के खिलाफ एमएमडीआर अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया गया है।

(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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