FTII कैंपस में ‘राम के नाम’ की स्क्रीनिंग के बाद छात्रों पर हमला, हमलावरों ने लगाए ‘जय श्री राम’ के नारे

नई दिल्ली। मंगलवार 23 जनवरी को पुणे में भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) कैंपस में कुछ उपद्रवी घुस आए। उन्होंने परिसर में “जय श्री राम” के नारे लगाए और छात्रों पर हमला कर दिया।

सोमवार 22 जनवरी की रात एफटीआईआई छात्रों के एक ग्रुप ने आनंद पटवर्धन की डॉक्यूमेंट्री ‘राम के नाम’ की स्क्रीनिंग की व्यवस्था की थी जो राम जन्मभूमि आंदोलन की सच्चाईयों को दर्शाती है।

एफटीआईआई छात्र संघ ने एक मीडिया विज्ञप्ति जारी की है जिसमें कहा गया है कि मंगलवार दोपहर 1.30 बजे लगभग 25 लोग कैंपस में घुस आए और “जय श्री राम” के नारे लगाने शुरू कर दिए, उन्होंने छात्रों को गालियां दीं।

इतना ही नहीं उन्होंने एफटीआईआईएसए के अध्यक्ष मनकप नोकवोहम, सचिव सायंतन और कुछ महिला छात्रों की कथित तौर पर पिटाई की। मैनकप को कई चोटें आईं हैं।

हमले के समय सुरक्षा गार्ड भी कथित तौर पर चुप रहे क्योंकि भीड़ ने परिसर में अपना उत्पात जारी रखा और “ज्ञान वृक्ष” तक पहुंच गई। पुलिस के पहुंचते ही भीड़ हटने लगी और सुरक्षा गार्ड उन्हें वापस मेन गेट पर ले गए। हैरानी की बात तो ये है कि पुलिस ने उपद्रवियों को जाने की इजाजत दे दी।

एफटीआईआई ने एक मीडिया बयान में कहा है कि “इन गुंडों ने हमारे कैंपस में घुसकर निर्दोष छात्रों पर गंभीर हमला किया और सुरक्षा कर्मचारी केवल मूक दर्शक बनकर देखते रहे। यह छात्रों के जीवन के मौलिक अधिकार पर खुला हमला और कानून-व्यवस्था की गंभीर विफलता है। एफटीआईआई छात्र संघ हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ-साथ छात्रों के जीवन पर इस तरह के गंभीर हमले के खिलाफ मजबूती से खड़ा है।”

पटवर्धन ने द टेलीग्राफ को बताया कि दक्षिणपंथी ताकतें उन परिसरों में छात्रों पर हमला कर रही थीं जहां उनकी डॉक्यूमेंट्री दिखाई जा रही थी।

उन्होंने कहा की “पिछले दो दिनों में डॉक्यूमेंट्री ‘राम के नाम’ की स्क्रीनिंग करने पर छात्रों और आयोजकों पर हमले की तीन घटनाएं हुई हैं। इस फिल्म को पुरस्कार मिल चुका है और इसकी स्क्रीनिंग को कानूनी तौर पर नहीं रोका जा सकता। दक्षिणपंथी ताकतों ने बर्बरता का सहारा लिया है। दक्षिणपंथी ताकतें नहीं चाहतीं हैं लोगों को इतिहास बताया जाए। वे चाहते हैं कि केवल मोदी की गतिविधियों का प्रचार किया जाए।”

केरल में सीपीएम की युवा शाखा डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया ने मंगलवार को संघ परिवार के कार्यकर्ताओं की ओर से एक फिल्म संस्थान के छात्रों द्वारा इसकी स्क्रीनिंग को रोकने की कोशिश के बाद ‘राम के नाम’ की स्क्रीनिंग करने का फैसला किया।

के.आर. के छात्र नारायणन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ विजुअल साइंस एंड आर्ट्स ने मूल रूप से सोमवार को कोट्टायम में सुविधा के मुख्य द्वार के बाहर शाम 7 बजे 1992 की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग तय की थी। जिसपर संघ परिवार के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर छात्रों पर हमले की धमकी दी। जिसके बाद पुलिस ने मामले में दखल देकर माहौल शांत किया।

आखिर में छात्रों ने कैंपस के अंदर फिल्म की स्क्रीनिंग की और डॉक्यूमेंट्री दिखाई। संस्थान के छात्र परिषद के अध्यक्ष, श्रीदेवन के. पेरुमल ने मंगलवार को द टेलीग्राफ को बताया कि “संघ परिवार के कार्यकर्ताओं ने खुले तौर पर हमारे अंगों को काटने की धमकी दी और हमारी महिला छात्रों के खिलाफ गलत टिप्पणियां और हरकतें की।”

डीवाईएफआई ने मंगलवार को राज्य में हर जगह डॉक्यूमेंट्री दिखाने का फैसला किया और यहां तक कि जो कोई भी इसे दिखाना चाहता है उसकी मदद भी करेगा।

डीवाईएफआई के केरल राज्य सचिव वी.के. सनोज ने संवाददाताओं से कहा कि “डीवाईएफआई न केवल संघ परिवार से किसी भी खतरे का सामना करेगा बल्कि राज्य भर में ‘राम के नाम’ की स्क्रीनिंग भी करेगा और जो व्यक्ति इसे दिखाना चाहेगा उसकी मदद भी करेगा।”

(‘द टेलिग्राफ’ में प्रकाशित खबर पर आधारित।)

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