संस्कृति-समाज

करीब पांच हजार निर्दोष भारतीयों की हत्या कर गांव का नामो-निशान मिटा दिया था, महुआ डाबर की कहानी हैरान कर देगी

बस्ती (यूपी)। करीब 5000 लोगों को घेर कर मार दिया गया था और महुआ डाबर नाम के… Read More

संजीव स्मृति व्याख्यान: तकनीक का इस्तेमाल कर अवैज्ञानिकता को बढ़ावा- गौहर रज़ा

इंदौर। धर्म में ग़लती बताने पर फ़तवा दे दिया जाता है, सिर भी क़लम किया जा सकता है,… Read More

इतिहास पुनर्लेखन या इतिहास का पुनर्मिथकीकरण- भाग 1

वर्गों में समाज-विभाजन से अस्तित्व में आये ‘सभ्यता’ के इतिहास के हर युग में ‘ज्ञान’ सामाजिक वर्चस्व… Read More

हिन्दी कविता के भूगोल को विस्तार देती हैं पार्वती तिर्की की कविताएँ

नई दिल्ली। हिन्दी कविता की युवतम पीढ़ी में पार्वती तिर्की का स्वर अलग से पहचाना जा सकता… Read More

मेरे हिस्से की अस्कोट आराकोट यात्रा: लुप्त होती लोहारी की कला

लोहार पीढ़ियों से किसानों के लिए औज़ार बनाते रहे हैं, जिनके बिना खेती का काम अधूरा था।… Read More

कास्ट एंड रिवोल्यूशन : जाति उन्मूलन का एक क्रान्तिकारी नज़रिया

नक्सलबाड़ी आन्दोलन के दौरान जब कॉमरेड चारू मजूमदार के नेतृत्व में CPI (ML) की पहली कांग्रेस 1970… Read More