ट्यूनीशियाई निर्देशक काउथर बेन हनिया ने बर्लिन में सिनेमा फॉर पीस कार्यक्रम में अपनी डॉक्यूमेंट्री द वॉइस ऑफ़ हिन्द रजब के लिए “मोस्ट वैल्यूएबल” फ़िल्म का पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कार्यक्रम बर्लिन फिल्मोत्सव के साथ हो रहा था और वह मंच पर उनके साथ “इजराइली” जनरल को भी सम्मानित करने का विरोध कर रही थीं।
अपने भाषण के दौरान उन्होंने ट्रॉफी पीछे छोड़ दी यह कहते हुए कि ऐसे पुरस्कारों का कोई अर्थ नहीं है जब ग़ज़ा में “नरसंहार” जारी है। उन्होंने छह वर्षीय हिन्द रजब की मौत को लेकर जवाबदेही और इंसाफ़ की माँग की।
द वॉइस ऑफ़ हिन्द रजब फ़िलिस्तीन रेड क्रिसेंट सोसाइटी द्वारा छह वर्षीय बच्ची हिन्द रजब को बचाने के प्रयासों पर आधारित है जो जनवरी 2024 में ग़ज़ा शहर में इजराइली सेना के हमले के दौरान एक कार में फंस गई थी।
बच्ची और उसका परिवार इजराइली सेनाओं द्वारा मार दिया गया था। इस दौरान मदद के लिए हिन्द रजब की गुहार के ऑडियो रिकॉर्डिंग से विश्व का ध्यान इस घटना पर गया। घटना पर आधारित बेन हनिया की फ़िल्म को बाफ़्ता और अकादमी पुरस्कारों के लिए नामांकन मिला है।
कार्यक्रम, जिसमें हिलेरी क्लिंटन और अभिनेता केविन स्पेसी मौजूद थे, हनिया मंच पर आईं लेकिन पुरस्कार लेने से मना किया। उन्होंने कहा कि ऐसे पुरस्कारों का कोई अर्थ नहीं है जब ग़ज़ा में नरसंहार जारी है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि हिन्द की मौत कोई एक घटना नहीं थी बल्कि बड़े मुद्दे का एक हिस्सा थी।
उन्होंने उन लोगों की आलोचना की जो नागरिकों की जान लेने को आत्मरक्षा का जामा पहनाकर राजनीतिक बचाव दे रहे हैं।
बेन हनिया का फैसला कार्यक्रम में एक “इज़राइली” जनरल को सम्मानित किए जाने का परिणाम था जिसे उन्होंने उस इजराइली सेना का प्रतिनिधि करार दिया जो ग़ज़ा में अत्याचारों के लिए ज़िम्मेवार है।
अपने भाषण में उन्होंने कहा, “मैं उनकी मौतों को शांति के बारे में एक विनम्र भाषण की पृष्ठभूमि बनाने से इनकार करती हूँ और मैं “ख़ुशी से” यह पुरस्कार स्वीकार करूँगी जब न्याय और जवाबदेही मिल जाएगी।
इससे पहले 80 से ज़्यादा फिल्मकारों ने ग़ज़ा पर सेंसरशिप का विरोध किया और फ़िलिस्तीन समर्थक आवाज़ों, जिनमें संबधित बयानों और विरोध पर पाबंदियाँ शामिल हैं, को लेकर फिल्मोत्सव की भूमिका की आलोचना की थी।
इससे पूर्व विख्यात लेखिका अरुंधति रॉय ने ग़ज़ा को लेकर फ़िल्मोत्सव जूरी की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए महोत्सव में शामिल होने से इनकार किया था। रॉय की लिखी 36 वर्ष पुरानी फ़िल्म “इन व्हिच एनी गिव्स इट दोज वंस” को फिल्मोत्सव के क्लासिक सेक्शन में दिखाने के लिए चुना गया था।
फ़िलिस्तीन के मुद्दे को समर्थन न दिए जाने को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में जूरी विम वेंडर्स ने जवाब दिया था, “हमें राजनीति से दूर रहना चाहिए।”
(जनचौक ब्यूरो)