भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने भाषण में ये कहकर कि जितना साहस सेना का जवान करता है उससे ज्यादा साहस एक व्यापारी करता है। सबको चौंका दिया था।उनका ये उद्गार राष्ट्रीय चैनलों ने ही नहीं बल्कि बीबीसी लंदन से भी प्रसारित हुआ था।जिसे बहुतेरे लोगों ने सुना भी था और इस पर लोगों की टिप्पणियां भी अधिक आईं थीं। लोग पहली बार व्यापारियों के अधिक साहस की बात से डगमगाए थे। अब तलक तो वतन की खातिर अपनी जान कुर्बान करने वाले सैनिकों को ही सबसे अधिक साहसी की संज्ञा दी जाती रही है।
मगर जब देश के पीएम इस बात को कह रहे हों तो यकीन तो करना ही पड़ेगा। यदि गंभीर होकर इस विषय पर हम सब सोचेंगे तो समझ आएगा कि मोदी जी की बात में कितना दम खम है। आपको याद रखना चाहिए कि मोदी जी और तमाम गुजराती भाई व्यापार में पारंगत हैं। मुकेश अंबानी और गौतम अडानी यूं ही दुनिया के अव्वल दर्जे के व्यापारी नहीं हैं। मोदी जी भी कह चुके हैं कि उनके लहू में व्यापार है।
अब जब एक व्यापारी प्रधानमंत्री बन गया तो उसने देश की धन सम्पदा बेचकर अपने जिगरी दोस्त अंबानी अडानी को सौंपकर जो साहस दिखाया वह दुर्लभ है। व्यापारी के कलेजे की मजबूती को इसी से समझा जा सकता है। कहते रहे देश नहीं बिकने दूंगा और देश बेचा जा रहा है। उसे ना जनता का डर रहा ना अदालतों का। व्यापारी कितना साहसी होता है कि वह गरीबों की मेहनत से उत्पादित सामान को सस्ते रेट में खरीदकर बड़ी गोदामों में भर लेता है, विदेश भेजकर कई गुना मुनाफा कमा लेता है। देश में जब इन उत्पादों की कमी हो जाती है तब उसके गोदामों से सस्ती कीमत पर खरीदे माल को चौगुने दाम पर गरीबों को बेचा जाता है।
और वहीं ऐसे ही उत्पाद को सरकार राशन में मुफ़्त पांच किलो अनाज बांटकर वोट और यश लूटकर जनता को बुरी तरह ठगती है। यह विकट तालमेल वाला व्यापार कितने साहस का काम होता है। यह गरीब किसान भला कैसे समझ सकता है। उसे तो फसल आते ही जाने कितने क़र्ज़ चुकाने होते हैं जिससे वह अपनी फसल कथित सरकारी रेट से भी बहुत कम दाम पर बेचने के लिए मज़बूर रहता है। इस एक कमज़ोरी की वजह से वह लूट का शिकार बन जाता है।जिसका इलाज दुनिया के सबसे बड़े और लगभग एक साल चले किसान आंदोलन के बावजूद नहीं हासिल किया जा सका है। इसकी वजह सिर्फ व्यापार करने वालों का साहस है जो मेहनतकश लोगों के पसीने पर लेशमात्र तरस नहीं खाते हैं।
समझा जाता है कि हमारे देश के पीएम के दोस्त डोनाल्ड ट्रम्प ने भी इस कुशल व्यापार राजनीतिज्ञ से जो हुनर सीखे थे उसका इस्तेमाल कर उन्होंने सारी दुनिया के साथ टैरिफ व्यापार युद्ध शुरू कर दिया जिससे उनका व्यापार सुदृढ़ हो। भारत भी इसका शिकार बन चुका है। डोनाल्ड आज का सबसे साहसी चतुर व्यापारी बन चुका है उसकी भी तारीफ़ होनी ही चाहिए।
कहने का आशय यह है कि यदि वर्तमान स्थिति को देखा जाए तो व्यापारी की ताकत और साहस ही देश के विकास और सुरक्षा की गारंटी देता है। वह ईडी, आईटी के जंजाल में हर साल फंसता है। कभी तो जेल की हवा भी खानी होती है। शुद्ध माल बेचेगा तो अधिक मुनाफा कैसे होगा इसलिए मिलावट भी ज़रूरी होती है। कभी-कभी तो दिखावे के लिए छापे खुद ही पड़वाए जाते हैं। ऐसी सेटिंक आसान नहीं। साहस का काम होता है। फिर इलेक्टोरल फंड देना भी पड़ता है ताकि नकली माल असली हो जाए और बिकवाली उम्दा हो। इस सबके बावजूद कभी फंडों के लेन देन में चूक हुई तो अनिल अंबानी की गति को प्राप्त हो जाने का खतरा आ जाता है। कुल मिलाकर व्यापार करना यकीनन बड़े साहस का काम है। मोदी जी ने दुरुस्त फ़रमाया है।
जहां तक सेना के जवानों के साहस का सवाल है तो वे भर्ती ही किए जाते हैं किसी भी तरह की कुर्बानी के लिए। ठीक ईद-उल-जुहा के बकरे की तरह। खूब आवभगत होगी।खिलाया पिलाया जाएगा फिर हलाल तो होना ही है। कभी बाढ़ में घुसो, कभी आतंकियों के दड़बे में जाओ। चुनाव कराओ और तो और विदेश जाकर वहां लड़ो, देश का नाम रोशन करो। बस और क्या करते हो जवानों। अब तो आगे आने वाले दिनों में चलकर तुम्हें युद्ध क्षेत्रों में लड़ने में भी नहीं जाना पड़ेगा।घर में बैठे बैठे ईरान -इज़राइल की तरह युद्ध होंगे।तब व्यापक छंटनी भी होगी।
कहने का आशय यह है तुम्हें अपने साहस का परिचय देना है तो एक चतुर व्यापारी बनो। जो आजकल वीरता का परिचायक है धीरता पूर्वक चतुराई के साथ व्यापार को बढ़ाना उद्देश्य होना चाहिए। भले ही मिसाइलों, ड्रोन या गगन भेदी यानों का व्यापार हो। अमेरिका बड़ा व्यापारी है इन हथियारों का। पेंटागन उसका नाम है जो सरकार चलाती है। ठीक वैसे ही जैसे भारत में अडानी अंबानी अब तक सरकार चला रहे थे।अब ऐलन मस्क के सहारे वतन साथियों।आईए, व्यापारियों के साहस को सलाम करें!
(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)