इस्तांबुल की फ़िज़ाओं में इंसानियत की सदा-जब आसिफ मुज़तबा की ख़ामोश आंखों से रौशनी बह निकली

इस्तांबुल/नई दिल्ली। कुछ लोग तारीख़ नहीं बदलते, तर्ज़-ए-फ़िक्र बदलते हैं। कुछ नाम अपने वजूद से नहीं, अपने… Read More

लातेहार पुलिस के जुल्म का शिकार आदिवासी अनिल को आखिरकार मिला इंसाफ और मुआवजा

झारखंड के लातेहार जिले के गारू थाना क्षेत्र और बरवाडीह प्रखंड के कुकु गांव निवासी 42 वर्षीय… Read More

फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप के विवादित बयान ने वर्चस्ववादी संस्कृति पर खड़े कर दिए हैं गहरे प्रश्नचिंह  

सोशल मीडिया पर आज के जमाने के मशहूर फिल्म निर्देशक, अनुराग कश्यप के खिलाफ गंदी-गंदी गालियों की… Read More

तहज़ीब की ताबानी पर साया-ए-सियाही- औरंगज़ेब से बहादुर शाह ज़फ़र तक तारीख़ की तौहीन का दर्दनाक फ़साना

तहज़ीब की रूह कभी-कभी चीख़ती नहीं, सिसकती है। वो शोर नहीं मचाती, बस ख़ामोश होकर हमारी पेशानी… Read More

जेपी की संस्था की स्वर्ण जयंती पर उठा सवाल, क्या भारतीय लोकतंत्र आईसीयू में है और वह अपनी अंतिम सांसें ले रहा है?

नई दिली। आज से करीब 50 साल पहले जयप्रकाश नारायण ने दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में… Read More

बनारस के संकट मोचन में गूंजते हैं इंसानियत के राग-जहां सुरों की हर लहर बहा ले जाती है मज़हब के फ़ासले!

बनारस। देश की सांस्कृतिक राजधानी बनारस में संकट मोचन मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि वह… Read More