Sunday, December 4, 2022

agriculture

बिहार में सूखा पड़ने की आशंका 

बिहार में सूखा जैसी हालत है। वर्षा बहुत कम हुई है। इसका सीधा असर धान की खेती पर पड़ा है। बहुत बड़े इलाके में रोपनी भी नहीं हुई। जहां नलकूप आदि की सहायता से रोपनी हो गई है, वहां...

‘क्षेत्रपति वर्ग’ के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है मौजूदा दौर

भारत में 'क्षेत्रपति वर्ग' का उल्लेख वेदों में स्पष्ट रूप से मिलता है। यह वो वर्ग है जो  भूमि स्वामी रहे। इस वर्ग में विभिन्न नस्ल जातियां धर्म और क्षेत्रों के लोग मूल रूप से भूमि से जुड़े कार्यों से जीवन यापन करते थे। जो मुख्यत: किसान थे। भौगोलिक क्षेत्र...

मुग़ल साम्राज्य से शर्म कैसी?

देश के वर्तमान शासकों के लिए आजकल इतिहास बदलने की जैसे हड़बोंग सी मची हुई है। साम्प्रदायिक आधार पर इतिहास को नकारने और नए सिरे से लिखे जाने के शोर में सच जैसे कहीं दब सा गया है। तकरीबन दो...

होली के दिन हरियाणा में दलित उत्पीड़न! जाट युवकों ने गाली-गलौच के साथ मिर्चपुर दोहराने की दी धमकी

बधावड़ (हरियाणा)। हरियाणा जहां दलित उत्पीड़न की घटनाएं ऐसे घटती हैं जैसे आप कपड़े बदलते हों। मिर्चपुर, भगाना, भाटला, डाबड़ा, मिरकां, छातर अनेक ऐसे गांव हैं जहां दलित उत्पीड़न की घटनाएं हुईं लेकिन उनको इंसाफ नहीं मिला। ये सब...

उत्तराखंड में भूकानून बन गया है बड़ा चुनावी मुद्दा

सोशल मीडिया के चिराग से 'उत्तराखंड मांगे भूकानून' का जिन्न पता नहीं कब बाहर निकल आया और सबकी ज़ुबान पर छा गया। आने वाले विधानसभा चुनाव में भी राजनीतिक पार्टियों के लिए भूकानून एक ऐसा मुद्दा है जिस पर...

सरकार ने कहा- एक क़दम पीछे हटे हैं फिर आगे बढ़ेंगे, किसानों ने कहा- दिल्ली का रास्ता भूले नहीं हैं

"हम एक कदम पीछे हटे हैं लेकिन आगे फिर बढ़ेंगे।” केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के उक्त बयान से नरेंद्र मोदी सरकार की मंशा जाहिर हो गई है और ख्याल लगाए जा रहे हैं कि चुनाव बाद सरकार...

संघर्ष का टेम्पलेट जो किसान आंदोलन ने दिया है

संयुक्त किसान मोर्चा ने 378 दिन के बाद अपने आंदोलन को स्थगित करते हुए कहा कि ‘लड़ाई जीत ली गई है, लेकिन किसानों के हक-खास कर एमएसपी को किसानों के कानूनी अधिकार के रूप में हासिल करने का युद्ध...

भारतीय कृषि के खिलाफ साम्राज्यवादी साजिश को शिकस्त

भारतीय किसानों ने मोदी सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने के लिए  बाध्य कर दिया। ये किसानों की जीत न केवल दुनिया के पैमाने पर अनोखी जीत है बल्कि तय है कि यह जीत दुनिया भर में पिछले...

कृषि कानूनों में काला क्या है -7: तीसरे संविधान संशोधन की एंट्री 33 बनी कृषि कानूनों के विवाद की जड़

किसान कृषि कानूनों को काला मानते हैं और कानून के जानकार भी कहते हैं कि कृषि से जुड़े मुद्दों पर कानून बनाने का अधिकार राज्य की सरकारों को फिर इस सीमा का उल्लंघन करके मोदी सरकार ने तीन कृषि...

किसानों की आत्महत्याएं बताती हैं कृषि संकट की गहराई

किसान आत्महत्याओं के बारे में जानने के लिए इसका इतिहास जान लेना भी आवश्यक है। और इसे महाराष्ट्र राज्य के संदर्भ में जानना तर्कसंगत होगा। सन 1990 में अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' के ग्रामीण मामलों के संवाददाता पी. साईंनाथ...
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 मोदीराज : याराना पूंजीवाद की पराकाष्ठा

पिछले पांच वर्षों में विभिन्न कम्पनियों द्वारा बैंकों से रु. 10,09,510 करोड़ का जो ऋण लिया गया वह माफ...
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