Wednesday, December 7, 2022

history

बेहद प्रासंगिक है वीके सिंह की किताब ‘ह्यूगो चावेज़ और वेनेज़ुएला की बोलीवरी क्रांति’

जहाँ पूंजीवाद अपने संकट के दौर में बर्बर हमले कर रहा होता है वहीं वह अपने विकासमान काल में सामंती और मध्यवर्गीय विश्वासों का ख़ात्मा करके ख़ुद को क्रांतिकारी ढंग से अनेक स्तरों पर विकसित भी करता है। मुनाफ़े...

बेहतर जनमत निर्माण के जरिये ही तैयार हो सकता है उम्दा नेतृत्व

लोकतंत्र एक गतिशील अवधारणा है। इसलिए सामाजिक, आर्थिक सांस्कृतिक और अन्य परिवर्तनों के अनुरूप लोकतंत्र का स्वरूप बनता-बिगडता रहा है। पाश्चात्य जगत में ज्ञान-विज्ञान के पालना के साथ-साथ लोकतंत्र की जन्मभूमि के रूप में विख्यात यूनान के एथेंस में...

‘अनहद’ का गांधी विशेषांक: सत्ता के नैतिक विमर्श में गांधी हमेशा बने रहेंगे

गांधी पर ‘अनहद’ का विशालकाय (650 पृष्ठों का) अंक एक सुखद आश्चर्य की तरह आया है; गांधी के हत्यारों के प्रभुत्व-काल में ही गांधी के पुनरोदय के संकेत की तरह के सुखद आश्चर्य की तरह। दरअसल गांधी का व्यक्तित्व अपनी...

विलुप्त प्राय बिरहोर का शब्दकोश तैयार कर देव कुमार ने रचा नया इतिहास

37 वर्षीय एक युवा देव कुमार, आत्मविश्वास से लवरेज, जो कुड़मी समुदाय से आते हैं। ये झारखंड की राजधानी राँची जिले के ओरमांझी प्रखंड के हेठ नगडू गाँव के एक किसान अघनु महतो की दो बेटियों के बाद तीसरी...

उत्तराखंड: इतिहास के पन्नों में खो जायेगी बेमिसाल पटवारी पुलिस

उत्तराखण्ड के इतिहास और सांस्कृतिक परिवेश से अनजान शासकों और प्रशासकों के कारण भारत की बेमिसाल पटवारी पुलिस जल्दी ही इतिहास के पन्नों में गुम हो जायेगी। ब्रिटिशकाल में इस क्षेत्र की विशिष्ट सामाजिक परिस्थितियों और नगण्य अपराधों के...

राजनीति का नया आख्यान रच रही है राहुल की ‘भारत जोड़ो यात्रा’

तमिलनाडु के कन्याकुमारी से, तीन समुद्रों के मिलन की उच्छल तरंगों की गर्जना के बीच से शुरू हुई भारत की राजनीति के इतिहास की सबसे लंबी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का अभी सिर्फ़ एक सप्ताह पूरा हुआ है। कुल 3750...

गांधी की दांडी यात्रा-2: नमक कर के विरोध का इतिहास और सत्याग्रह की भूमिका

गांधी के सविनय अवज्ञा आंदोलन और सत्याग्रह की योजना के पहले, नमक पर कर और उसके विरोध के इतिहास पर भी एक नजर डालते हैं। ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि नमक पर, कर 1930 में ही लगाया गया...

मंजिल की जुस्तजू में कांग्रेस का कारवां

किसी शायर ने क्या खूब कहा है: मंजिल मिले, मिले, न मिले, कोई गम नहीं, मंजिल की जुस्तजू में मेरा कारवां तो है। हिन्दी के जनप्रतिबद्ध साहित्यकारों में अग्रगण्य बाबा नागार्जुन इसी बात को कुछ यों कहा करते थे...

मंजिल की जुस्तजू में कांग्रेस का कारवां

किसी शायर ने क्या खूब कहा है: मंजिल मिले, मिले, न मिले, कोई गम नहीं, मंजिल की जुस्तजू में मेरा कारवां तो है। हिन्दी के जनप्रतिबद्ध साहित्यकारों में अग्रगण्य बाबा नागार्जुन इसी बात को कुछ यों कहा करते थे...

मुरादाबाद भी रहा स्वतंत्रता आन्दोलन का गवाह, यहीं से फूटी थी खिलाफत और असहयोग की ज्वाला 

मानव इतिहास में 15 अगस्त, 1947 को ऐसी घटना घटी जिससे न केवल दो देशों के बीच की सरहदें बंट गईं बल्कि दिल भी बंट गए। जिसने भी विभाजन विभीषिका का दंश झेला उसके दिल में विभाजन के प्रति...
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साईबाबा पर सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार के लिए चीफ जस्टिस से अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की अपील

उन्नीस वैश्विक संगठनों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़  को संयुक्त पत्र लिखकर कथित 'माओवादी लिंक' मामले में...
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