Saturday, October 1, 2022

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आजादी के बाद भी अंडमान जेल से छूटे त्रैलोक्यनाथ के तेवर रहे तल्ख

कर्नाटक राज्य स्कूल बोर्ड की किताब में, सावरकर द्वारा अंडमान जेल की कोठरी से, एक बुलबुल पर सवार होकर, रोज वहां से निकल कर भारत आने और चले जाने की रूपक कथा का, जब उपहास उड़ा तो कर्नाटक सरकार...

देखने वाले की एकांगी दृष्टि का दोष है सावरकर का महिमामंडन

यह एक बहुत दिलचस्प प्रसंग है । हमारे मित्र अजय तिवारी ने फेसबुक पर एक पोस्ट लगाई वीर सावरकर के बारे में । शायद उन्हें लगा कि आज के सावरकर की स्तुति के काल में भी उनके प्रति ‘न्याय’...

आज़ादी के जश्न से आज भी दूर हैं बापू

15 अगस्त, 1947 को जब देश की आजादी का ऐलान हुआ, वह गाँधी जी के लिए जश्न का दिन नहीं था। इधर देश उत्सव में मग्न था, और उधर महात्मा गांधी 14 अगस्त, 1947 की रात कलकत्ता में शांति...

गांधी अभय हैं पर सावरकर में भय है

दिल्ली स्थित गांधी दर्शन और स्मृति नामक संस्थान ने अपनी पत्रिका `अंतिम जन’ का सावरकर विशेषांक निकाला है। एक तरफ इसका चारों ओर यह कहते हुए प्रचार किया जा रहा है कि इतिहास में गांधी से कम नहीं हैं...

नये पहलुओं को सामने लाती है गांधी हत्या से जुड़ी गोडसे पर धीरेंद्र झा की नई किताब

अब तक, गांधीजी की हत्या, हत्या की साजिश, अदालती सुनवाई (ट्रायल) जैसे मख़्सूस मौज़ू' पर कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। जिसमें जस्टिस जी.डी खोसला (1963), केएल गौबा (1969), वकील पी.एल. इनामदार (1979), जे.सी. जैन (1961), तपन घोष...

गांधी हत्याकांड पर नयी किताब – ‘द मर्डरर, द मोनार्क एंड द फ़क़ीर’ सावरकर को करती है कठघरे में खड़ा

द मर्डरर, द मोनार्क एंड द फकीर, (The Murderer, The Monarch and The Fakeer) इस साल सावरकर पर आने वाली तीसरी महत्वपूर्ण किताब है। इसके पहले दो और किताबें आयीं जिनकी बहुत चर्चा हुयी, पर इस किताब की चर्चा...

आजादी की लड़ाई की कब्र पर हिंदुत्व का फूल खिलाने की कोशिश!

शुरुआत हुई थी जवाहर लाल नेहरू से। नेहरू को संघी आखिरी अंग्रेज घोषित किए थे। और उनके बहाने सेकुलर शब्द को सबसे ज्यादा बदनाम किया गया था। और आखिर में सेकुलर को सेखुलर करार देते हुए उसे एक गाली...

सावरकर का हिंदुस्थान-1: प्रतिशोध और प्रतिहिंसा पर आधारित है सावरकर का दर्शन

सावरकर के आधुनिक पाठ में उन्हें वैज्ञानिक, आधुनिक और तार्किक हिंदुत्व के प्रणेता तथा हिन्दू राष्ट्रवाद के जनक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। रणनीति कुछ ऐसी है कि जब सावरकर के इन कथित विचारों को प्रचारित...

सावरकर दया याचिका: गांधी अपने सिद्धांतों के खिलाफ जाकर किसी को नहीं देते थे सलाह

हिन्दू राष्ट्रवाद अपने नये नायकों को गढ़ने और पुरानों की छवि चमकाने का हर संभव प्रयास कर रहा है। इसके लिए कई स्तरों पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। हाल में 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) को महात्मा गांधी के...

माफीनामों के वीर हैं सावरकर

सावरकर सन् 1911 से लेकर सन् 1923 तक अंग्रेज़ों से माफी मांगते रहे, उन्होंने छः माफीनामे लिखे और सन् 1923 के बाद वह लगातार ही इस देश की जनता को बांटने की बात करते रहे। नफरत और हिंसा की...
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सोडोमी, जबरन समलैंगिकता जेलों में व्याप्त; कैदी और क्रूर होकर जेल से बाहर आते हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि भारत में जेलों में अत्यधिक भीड़भाड़ है, और सोडोमी और जबरन समलैंगिकता...
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