बिहार का छात्र आंदोलन क्यों दूसरे राज्यों से अलग दिखाई दिया? 

नीट पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (अब इस्तीफ़ा दे चुके हैं) के खिलाफ जंतर मंतर से शुरू हुआ आंदोलन देश भर में फैल गया लेकिन लेकिन बिहार में प्रदर्शनों ने अपनी तीव्रता और व्यापकता के कारण अलग पहचान बनाई। बिहार के आंदोलन के कुछ पहलू इसे अन्य राज्यों के आंदोलनों से अलग करते हैं। सोशल मीडिया पर बिहार के प्रदर्शन से जुड़े मीम्स वायरल हुए, कुछ स्थानों पर पुलिस ने गोली चलाई और राज्य के बड़े नेता भी गिरफ्तार किए गए।

सत्ता पक्ष के विधायक के अलावा पुलिस को मार तक खानी पड़ी। आइए शुरू से विस्तार से समझते हैं कि बिहार का यह आंदोलन बाकी आंदोलनों से कैसे अलग था।

“आंदोलन के दौरान पुलिस तंत्र का मजाक किस राज्य में हुआ? पत्रकारों के अलावा सत्ता पार्टी के विधायक को मार किस राज्य में लगी? किस राज्य में आंदोलन के दौरान पुलिस को गोलीबारी करना पड़ी? सिर्फ पुलिस की गाड़ियां नहीं क्षतिग्रस्त हुईं बल्कि पुलिस को मारा भी गया है? सबका जवाब बिहार है। बिहार का आंदोलन सत्ता को बदलने की क्षमता रखता है।” पटना यूनिवर्सिटी के छात्र और युवा नेता अमित चौधरी बताते हैं। 

बिहार में हुए छात्र आंदोलन के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में प्रदर्शन के तरीके पारंपरिक रूप से अलग दिख रहे हैं। कुछ छात्र बैरिकेड को साइकिल की तरह घुमा रहे हैं। वाटर कैनन के सामने छात्र नाच-गाना कर रहे हैं। पुलिस के कड़े कदम उठाने पर भी प्रदर्शनकारी और संगठित होते नजर आए। कई बार पुलिस ने आंसू गैस या अन्य कड़ी कार्रवाई की तैयारी दिखाई, तो कुछ छात्र पूछते दिखे, “आंसू गैस कब चलेगी?” 

जब पुलिस ने रस्सी से इलाके को घेरने की कोशिश की, तब छात्र ‘टग ऑफ वार’ जैसा विरोध कर रहे थे और बंद किए गए गेट भी तोड़ दिए गए। कई जगहों पर पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया, मगर प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक विरोध जारी रखे रहे। कुछ समूहों ने विरोध के दौरान ‘जन गण मन’ गाना शुरू कर दिया, जिससे माहौल और भावनात्मक दिखा।

छात्र आंदोलन पर किताब लिख चुके अभिनव भारद्वाज बताते हैं कि, “बिहार की सड़कों पर जिस तरह का प्रदर्शन दिखा यह उभार इस बात का संकेत है कि लोकतंत्र में जनता अंततः अपनी बात कहने का रास्ता खोज ही लेती है। युवाओं के बीच मानो प्रतिस्पर्धा है कि इस उभार के साथ कौन स्वयं को अधिक मजबूती से जोड़ पाता है। हर दल अपनी-अपनी शैली में इस आंदोलन के निकट दिखाई देना चाहता है।” 

धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी बिहारियों ने ही हिलाई

बिहार नवनिर्माण सेना से जुड़े राजन बताते हैं कि, “बिहार की खासियत यही है कि यहां छात्र आंदोलन अक्सर स्थानीय गुस्से से निकलकर व्यापक सामाजिक मुद्दे का रूप ले लेता है। इस बार भी वह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि व्यवस्था पर सवाल बनकर उभरा है।”

राजधानी दिल्ली में शुरू हुए प्रदर्शन की आग 22 जुलाई को पटना पहुंच गई। कम्युनिस्ट छात्र संगठनों ने स्थानीय छात्रों को प्रदर्शन के लिए बुलाया था। स्थानीय पत्रकार सन्नी के अनुसार इस मार्च में कई कोचिंग संस्थानों के छात्र भी शामिल थे। इसमें भाजपा के विधायक विनय बिहारी के अलावा कुछ नेताओं और पत्रकारों पर छात्रों ने हमला किया।

अन्य राज्यों के आंदोलनों की तुलना में इसका प्रसार व्यापक और तेज़ रहा। न्यूज़ रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के सभी जिलों से आंदोलन की खबर देखने को मिली है। खास बात यह रही कि इसमें राजनीतिक टकराव भी जुड़ गया। कुछ स्थानों पर छात्रों और पुलिस के बीच झड़प, पथराव और लाठीचार्ज की घटनाएं सामने आईं, जिससे आंदोलन का स्वर और ज्यादा तीखा हो गया

बिहार के स्थानीय और वरिष्ठ पत्रकार परमवीर सिंह बताते हैं कि,”धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी बिहारियों ने ही हिलाई। दिल्ली के प्रदर्शन में भी सबसे बड़ी भागीदारी बिहार के छात्रों की रही। फिर बिहार ने जिस तरह इस आंदोलन की कमान संभाली, पूरी कहानी ही बदल गई। राज्य के तमाम जिले सुलग उठे। पुलिस जितना एक्शन करती गई, जनता का रिएक्शन उतना ही तेज होता गया। दिल्ली से ज्यादा लाठियां बिहार में चलीं। प्रधानमंत्री मोदी को शायद जेपी आंदोलन की झलक दिखने लगी। डर यह था कि कहीं धर्मेंद्र  की कुर्सी बचाने के चक्कर में नरेंद्र की कुर्सी ही खतरे में न पड़ जाए।” 

पेपर लीक आंदोलन को बिहार में कुचलने के लिए बिहार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए विधायक संदीप सौरभ के अलावा कई कम्युनिस्ट पार्टी के नेता को गिरफ्तार किया है। कई विपक्ष पार्टी के नेता और छात्र इस गिरफ्तारी का विरोध कर रहे हैं। 

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के दिन बिहार में क्या हुआ?

25 जुलाई शनिवार की शाम भारत के तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया उस दिन छात्रों पर लाठीचार्ज के ख़िलाफ़ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर बिहार बंद बुलाया गया था। आंदोलन के दौरान कई जगहों पर झड़प और पुलिस कार्रवाई भी हुई, जिससे माहौल और तनावपूर्ण बन गया।

बिहार बंद के दौरान छात्र आंदोलन बेहद हिंसक हो गया। तमाम मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक छपरा में छात्रों ने पुलिस वैन जला दी, सिवान में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, कई जिलों में पुलिस ने छात्रों पर लाठी चार्ज किया वहीं कई जगह प्रदर्शनकारियों ने भी पत्थर बरसाए है, पुलिस की कई गाड़ियां तोड़ी गईं, कई जगहों पर पुलिसवालों को दौड़ा दौड़ा कर पीटे जाने की भी खबर है।

वहीं बिहार के जहानाबाद एवं सिवान जिले में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस ने गोलीबारी की। युवा हल्ला बोल से जुड़े गोविंद बताते हैं कि देश भर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया, पर बिहार को छोड़कर कहीं भी पुलिस ने गोलियां नहीं चलाई। आपराधिक इतिहास वाले सम्राट चौधरी ने बिहार पुलिस को ट्रिगर हैप्पी बना दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को जवाब देना पड़ेगा कि जहानाबाद में छात्र आंदोलन पर पुलिस फायरिंग क्यों करवाई गई ? अब भी भाजपा सरकार को समझ नहीं आ रहा कि जितना अधिक छात्रों का दमन होगा, आंदोलन उतना व्यापक होता जाएगा।”

राजधानी पटना में छात्रों के प्रदर्शन के बाद जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। 

दिल्ली के बाद अगला आंदोलन बिहार के पटना में करेंगे

दिल्ली में हो रहे जंतर मंतर में आंदोलन के दौरान कॉकरोच पार्टी से जुड़े नेता ने बिहार से युवाओं को आने की अपील की।  वहीं आंदोलन के दौरान कॉक्रोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने घोषणा की है कि दिल्ली के बाद उनका अगला आंदोलन बिहार की राजधानी पटना में होगा। 

बिहार की एक छात्रा के सवाल के जवाब में दीपक ने कहा कि, “दिल्ली के बाद अब बिहार में आंदोलन करेंगे। छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर देशव्यापी अभियान जारी रहेगा और पटना इसका अगला प्रमुख केंद्र होगा। सरकार के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन किया जाएगा और छात्रों की मांगों को लेकर जनसमर्थन जुटाया जाएगा।”

बिहार में शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन बिहार की शिक्षा व्यवस्था को कितना बेहतर करेगा, यह आने वाला वक्त तय करेगा। 

(राहुल गौरव रिपोर्टर हैं।)

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