1- पिछले दो सालों में इजरायल ने 60 हजार फिलिस्तीनियों की हत्या की है।
2- मारे गए 60 हजार फिलिस्तीनियों में 18 हजार बच्चे हैं।
3- मारे गए 60 हजार फिलिस्तीनियों में 10 हजार महिलाएं हैं।
4- मारे गए 60 हजार लोगों में 30 हजार लोगों में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं।
5- 1,300 फिलीस्तीनियों को तब मारा गया है, जब वे खाद्य सामग्री पाने की लाइन में लगे थे।
6- इजरायल के कब्जे वाले फिलिस्तीन में फिलिस्तीनियों की औसत आयु 75.5 साल से घटकर 45.5 साल हो गई है। साफ है कि जहां करीब दो वर्ष पहले एक फिलिस्तीन की जीवित रहने की संभावना 75.5 वर्ष थी। वह 30 वर्ष घट गई है, क्योंकि इजरायल बच्चों, किशोरों, युवाओं और प्रौढ़ लोगों की हत्या कर रहा है।
7- इजरायल ने फिलिस्तीन के उस अस्पताल को नष्ट कर दिया है, जहां फिलिस्तीनी स्त्री-पुरूष अपने शुक्राणु-वीजाणु ( 4,000embryos and 1,000 sperm ) को प्रिजर्व कर के रखे थे। रिपोर्ट यह कहती है कि यह जानबूझ कर टारगेट करके किया गया है, ताकि भविष्य में फिलिस्तीनी नए बच्चों को जन्म देकर अपनी आबादी न बढ़ा सकें। विशेष तौर उस नाइट्रोजन टैंक को नष्ट किया गया, जहां ये embryos और sperm रखे गए थे।
8- रिपोर्ट बताती है कि इजरायल ने जान बूझकर फिलिस्तीन के अस्पतालों, स्कूलों, नागरिक सुविधाओं और मानवीय मदद के केंद्रों को अपने हमले का निशाना बनाया।
9- संयुक्त राष्ट्र संघ के अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice-)जनवरी 2024 में इजरायल को नरसंहार का दोषी ठहराया था और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेत्यन्याहू को युद्ध अपराधी।
द हिंदू से बात करते हुए संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयोग के कमिश्नर नवी पिल्लै ने कहा कि यदि कोई देश अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय द्वारा इजरायल को फिलिस्तीन में युद्ध अपराध का दोषी ठहराये जाने के बाद इजरायल को युद्ध सामग्री और अन्य सैन्य सामान की आपूर्ति करता है, तो वह इस युद्ध अपराध का दोषी है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि भारत इजरायल की सैन्य मदद कर रहा है, तो यह शर्मनाक है।
यह रिपोर्ट 16 सितंबर, 2025 को जारी हुई थी।
(स्रोत- द हिंदू, 3 अक्टूबर 2025, दिल्ली संस्करण, पृ. 16)
प्रस्तुति: डॉ. सिद्धार्थ