सोशल एक्टिविस्ट और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने उनकी नज़रबंदी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर यह रिट याचिका गुरुवार को दायर की गई। 26 सितंबर को लद्दाख में राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत उन्हें नज़रबंद कर दिया गया।
गीतांजलि अंगमो ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के माध्यम से अपने पति की रिहाई की मांग की, जो कथित तौर पर लद्दाख में हिंसक झड़पों के बाद हिरासत में लिए जाने के बाद जोधपुर (राजस्थान) की एक जेल में बंद हैं।
उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “मैंने वांगचुक की नज़रबंदी के ख़िलाफ़ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के ज़रिए सुप्रीम कोर्ट से राहत मांगी। आज एक हफ़्ता हो गया। अभी भी मुझे सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य, उनकी हालत और नज़रबंदी के कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।”
उम्मीद है कि दशहरा की छुट्टियों के बाद 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के फिर से खुलने पर इस मामले की तत्काल सुनवाई हो सकती है। नवोन्मेषक और रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता वांगचुक लद्दाख में पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर प्रमुख आवाज़ रहे हैं।
बुधवार को ही गीतांजलि अंगमो ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक भावुक पत्र लिखकर अपने पति की बिना शर्त रिहाई की मांग की थी। सोनम वांगचुक को हिंसक विरोध प्रदर्शन भड़काने के आरोप में हिरासत में लेकर जोधपुर जेल ले जाया गया था। उन्होंने अपील की कि राष्ट्रपति एक आदिवासी होने के चलते लद्दाख के लोगों की भावनाओं को समझें।
राष्ट्रपति मुर्मू को भेजे 3 पेज के पत्र में अंगमो ने आरोप लगाया कि पिछले 4 सालों से लोगों के हितों के लिए काम करने के कारण उनके पति के खिलाफ जासूसी कराई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने पति की स्थिति के बारे में पूरी तरह से अनजान हैं।