देश रूल ऑफ लॉ से चलना चाहिए : जस्टिस उज्जवल भुइयां

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्जवल भुइयां ने शनिवार को एक कार्यक्रम में कहा कि देश में निश्चित तौर पर कानून का शासन चलना चाहिए और सार्वजनिक नैतिकिता के मुक़ाबले संवैधानिक नैतिकता को हर हाल में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

जस्टिस भुइयां हैदराबाद में संवैधानिक नैतिकता और जिला न्यायपालिका की भूमिका पर तेलंगाना जजेज एसोसिएशन और तेलंगाना स्टेट जुडिशल एकैडमी की ओर से आयोजित आयोजित एक सेमीनार में बोल रहे थे।

बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस भुइयां ने नाज फाउंडेशन बनाम भारत सरकार मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले और नवतेज सिंह जोहर केस में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ से इसके समर्थन का हवाला देते हुए कहा, ‘हमारी योजना में संवैधानिक नैतिकता को सार्वजनिक नैतिकता के मुकाबले अहमियत मिलेगी, चाहे बहुमत का नजरिया उसी के पक्ष में हो।’

जस्टिस भुइयां ने कहा, ‘एक संवैधानिक अदालत के लिए, उसके सामने मौजूद संवैधानिकता का मुद्दा प्रासंगिक है, प्रभावशाली या लोकप्रिय नजरिया नहीं।’ उन्होंने इस दृष्टिकोण को और साफ करते हुए कहा, ‘संवैधानिक नैतिकता वह बेंचमार्क है, जिसका पालन संविधान हम सबसे चाहता है…असल में यह साथी इंसानों के प्रति सम्मान और आदर का बर्ताव है।’

उन्होंने न्यायिक स्वतंत्रता को लेकर कहा, ‘न्यायिक स्वतंत्रता, जो कि बिना अनुचित प्रभाव से प्रभावित हुए, कानून के अनुसार स्वतंत्र तरीके से फैसला लेने की जज की क्षमता है, एक संस्थागत आवश्यकता है…इस संवैधानिक आदेश का मतलब जज अपनी समझ और कारण के आधार फैसला देने में सक्षम है, न कि सुविधा या पक्षपात के हिसाब से।’

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)

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