माओवाद खत्म करने के नाम पर निशाने पर आदिवासी, असल मकसद जल, जंगल ज़मीन कॉर्पोरेट के हवाले करना : माले

भाकपा (माले) झारखंड राज्य कमेटी ने एक  प्रेस बयान जारी कर कहा गया है कि मोदी सरकार द्वारा माओवादियों को खत्म करने के नाम पर देश के आदिवासियों को निशाना बनाया जा रहा है, उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है, गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है, उनकी हत्या की जा रही है। इस पूरी नीति का असली मकसद जल, जंगल, जमीन को कॉरपोरेट हितों के हवाले करना है।

माले का मानना है कि जल, जंगल, जमीन का सवाल आज भी अनसुलझा है। आजीविका, विस्थापन, वन अधिकार, सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे आज भी ज्यों के त्यों बने हुए हैं।

पार्टी ने आगे कहा है कि जब तक इन बुनियादी सवालों का समाधान नहीं होगा, तब तक जन संघर्ष नए-नए रूपों में सामने आता रहेगा।

सरकार इन सवालों को हल करने के बजाय अर्धसैनिक बलों और पुलिस के जरिए दमन का रास्ता अपना रही है, जो न तो संवैधानिक है और न ही न्यायसंगत।

पार्टी ने आरोप लगाया है कि माओवाद विरोधी अभियान के नाम पर निर्दोष आदिवासियों की हत्या, बिना न्यायिक प्रक्रिया के गिरफ्तारी और जेल भेजने जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई जगहों पर सुरक्षा बलों द्वारा आदिवासियों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश की जा रही है।

भाकपा (माले) ने आरोप लगाया कि यह पूरा अभियान कॉरपोरेट हितों से जुड़ा हुआ है। बड़े कॉरपोरेट घराने जैसे अडानी, अंबानी आदि को जंगल, जमीन और खनिज सम्पदा पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं और सरकार उनकी मदद कर रही है। झारखंड में भी “जल, जंगल, जमीन” की लूट तेज हुई है और माओवादी विरोध के नाम पर आदिवासियों पर झूठे मुकदमे किए जा रहे हैं।

पार्टी ने कहा है कि संसद में इन गंभीर मुद्दों पर कोई सार्थक चर्चा नहीं हो रही है। बेरोजगारी, महंगाई, पर्यावरण संकट और एलपीजी गैस की बढ़ती कीमतों जैसे सवालों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

माले ने कहा है कि इतिहास गवाह है कि औपनिवेशिक शासन में भगत सिंह और उनके साथियों को भी देशद्रोह के आरोप में दंडित किया गया था और उन्हें फांसी दी गई थी। उसी तरह आज की सरकार भी असहमति रखने वाले लोगों को “अर्बन नक्सल” या “माओवादी” बताकर उन्हें अपराधी घोषित कर रही है। इस तरह की भाषा और ढांचे का इस्तेमाल कर सरकार गैर-न्यायिक हत्याओं को न केवल सही ठहराने की कोशिश कर रही है, बल्कि उसे बढ़ावा भी दे रही है।

पार्टी ने कहा है कि देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अपराध से निपटने के लिए पहले से ही संवैधानिक और न्यायिक व्यवस्था मौजूद है। केवल इसलिए किसी विचारधारा को अपराध घोषित कर देना कि वह सत्ताधारी दल को पसंद नहीं है, न केवल गलत है बल्कि यह भारत की न्यायिक परंपरा और संविधान की भावना के भी खिलाफ है।

पार्टी ने मांग की है कि वह इस रास्ते को तुरंत बंद करे तथा लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से समस्याओं का समाधान करे।

(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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