एक ओर यूएपीए में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत के मामले पर अब बड़ी बेंच फैसला करेगी। इस मामले में शुक्रवार को दिन में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने ज़ोर देकर कहा था कि इस मामले को एक बड़ी बेंच के पास भेजा जाए। दूसरी ओर एक दूसरे मामले में अन्य बातों के अलावा, साढ़े चार साल से ज़्यादा समय तक हिरासत में रहने की बात पर ध्यान देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के ‘बड़ी साज़िश’ मामले में यूएपीए के आरोपी सुहैल अहमद ठोकर को ज़मानत दे दी।
यह मामला संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद सामने आया था। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह आदेश पारित किया।
इस बीच अब सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आतंकवाद और यूएपीए यानी गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामलों में जमानत देने के नियमों पर अहम फ़ैसला सुना दिया। कोर्ट ने दिल्ली दंगे मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न देने वाले अपने पुराने फैसले पर सवाल उठाते हुए मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया है।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने यह आदेश दिया। इसके साथ ही, इस मामले में शामिल दो अन्य आरोपियों- तसलीम अहमद और खालिद सैफी को 6 महीने की अंतरिम जमानत भी दे दी।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट से कहा कि यूएपीए मामलों में जमानत के नियमों पर दोबारा विचार होना चाहिए। उन्होंने हाल के एक फ़ैसले पर सवाल उठाया। इससे पहले न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने नार्को-टेरर मामले में स्येद इफ्तिखार अंदरबी को जमानत देते हुए कहा था कि यूएपीए मामलों में भी ‘जमानत नियम है, जेल अपवाद’। उन्होंने उमर खालिद वाले पुराने फ़ैसले पर संदेह जताया था।
एसजी राजू ने कहा कि यूएपीए जैसे गंभीर मामलों में सभी आरोपियों को एक जैसी छूट नहीं दी जा सकती है। हर मामले को अलग-अलग देखना चाहिए।
बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केए नजीब वाले पुराने फैसले में दिए गए सिद्धांतों को लेकर अब भ्रम है। खासकर यूएपीए की धारा 43डी(5) यानी जमानत के सख्त नियम और अनुच्छेद 21 यानी जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, यह तय करना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया कि एक बेंच दूसरे बराबर की बेंच के फ़ैसले को आसानी से नहीं बदल सकती। क़ानून में स्पष्टता होनी चाहिए, इसलिए यह मुद्दा मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा जा रहा है ताकि बड़ी बेंच बने और अंतिम फैसला दे।
तसलीम अहमद और खालिद सैफी को 6 महीने के लिए अंतरिम जमानत मिल गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले इनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। बता दें कि उमर खालिद और शरजील इमाम को अभी जमानत नहीं मिली है। उनका मामला अब बड़ी बेंच तय करेगी। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच 2020 दिल्ली दंगे के दो आरोपियों- तसलीम अहमद और खालिद सैफी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)