नोएडा मजदूर आंदोलन : गिरफ्तार पत्रकार सत्यम वर्मा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा मजदूर प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार पत्रकार सत्यम वर्मा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया।

जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस देवेंद्र सिंह-प्रथम की पीठ ने सत्यम वर्मा की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट एस.एफ.ए. नकवी तथा अधिवक्ता शाश्वत आनंद और अंकुर आजाद की दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया।

अदालत ने राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय दिया। साथ ही याचिकाकर्ता को उसके बाद प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने की अनुमति भी दी गई। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को होगी।

यह बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सत्यम वर्मा की पत्नी की ओर से दायर की गई है, जिसमें उनकी गिरफ्तारी, हिरासत, रिमांड और आगे की न्यायिक अभिरक्षा को चुनौती दी गई। याचिका में आरोप लगाया गया कि गिरफ्तारी और हिरासत की प्रक्रिया में गंभीर कानूनी अनियमितताएं हुईं। साथ ही अदालत से वर्मा को रिहा करने और हिरासत से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक तथा दस्तावेजी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की गई।

सत्यम वर्मा को 17 अप्रैल को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया। बाद में 13 मई को उन पर कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत भी कार्रवाई की गई। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत की गई कार्रवाई को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही 19 मई को उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर चुका है।

न्यूनतम वेतन वृद्धि, बेहतर कार्य स्थितियों और अन्य मांगों को लेकर नोएडा में अप्रैल के दूसरे सप्ताह से मज़दूर प्रदर्शन कर रहे थे और 13 अप्रैल को वाहनों को जलाने, पथराव की घटनाएँ हुईं। पुलिस ने मज़दूरों पर लाठी चार्ज भी किया।

पुलिस ने सैकड़ों मजदूरों को हिरासत में लिया और हिंसा भड़काने के आरोप में साथ मज़दूर कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया जिनमें पत्रकार सत्यम वर्मा शामिल हैं। वर्मा पर 13 मई को राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लगाने की घोषणा की गई।

इस बीच, 20 मई को जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)

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