प्रफुल्ल कोलख्यान

तमाम प्रतिकूलताओं के बावजूद जनविवेक से स्थिति में बदलाव होगा

भारत में लोकतंत्र के भविष्य को लेकर कुछ गहरी आशंकाएं उभर रही हैं। इतिहास की गहरी घाटियों… Read More

पुरखे आते हैं देखने, कुर्बानियों की कद्र और वोट ठगेरों से बचने के उपाय

पर्व त्यौहार के दिन लोग नये-नये कपड़े पहनते हैं। अच्छा-अच्छा खाना खाते हैं। खुश रहते हैं। खुशियां… Read More

लोक-लुभावन राजनीति के गगनचर सपनों के सुराख से सड़क का जायजा

विभिन्न विश्व मानकों पर भारत की स्थिति सकारात्मक और सराहनीय नहीं कही जा सकती है। विश्व-गुरु बनने… Read More

तर्कशील लोकतंत्र और तर्कातीत चुनाव में आयुधीकृत अर्धसत्य का विष-प्रभाव

युवाओं का सभ्यता के विकसित होने में बड़ा योगदान रहा है। कहना न होगा कि ‎‘विकसित भारत’… Read More

व्यक्तिवाद-परिवारवाद और समाजवाद अपनी जगह, चुनाव में चाहिए संविधानवाद

जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में चुनाव का बहुत महत्व होता है। हम सब हर पल किसी-न-किसी तरह… Read More

धीमी आवाज पर कान हो हाथ में वोटर कार्ड हो कि यह मुल्क हम सब का ‎है

पूरी दुनिया भारत के लोकतंत्र के भविष्य पर भारत के निर्णय का बेकरारी से इंतजार कर रहा… Read More