प्रफुल्ल कोलख्यान

नफरती माहौल के खिलाफ जनता को एकजुट होना ही होगा

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की इस सरकार का सौ दिन पूरा हुआ है। उसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र… Read More

मुल्क की हवा में इतने कील-कांटे कि गुब्बारा उड़ते ही फट जाता है

अपनी जात पूछने जैसे अपमान को परे झटककर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जब संसद में दहाड़ते… Read More

यतो धर्मस्ततो जयः पूजा करना ही नहीं चाहिए, करते हुए दिखना भी चाहिए

इस समय जब हमारे चारो ओर ‘न्याय चाहिए-न्याय चाहिए’ की गुहार गूंज रही है। न्याय विचार की… Read More

झूठ-फरेब के भ्रम-जाल के भीतर से भारत के लोकतंत्र में नये आदमी का नया सूरज उगेगा

अभी पिछले दिनों नेता प्रतिपक्ष संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा पर थे। वहां विभिन्न कार्यक्रम में उन… Read More

सामाजिक समता हो या समरसता सुनिश्चित करने के लिए संसाधनिक वितरण में संतुलन का सवाल

सामने हरियाणा और जम्मू-कश्मीर की विधानसभाओं का चुनाव है। राजनीतिक विशेषज्ञ और विश्लेषक चुनाव के माहौल और… Read More

संतुलित समृद्धि के लिए जाति-जनगणना के दर्पण में भारत के लोकतंत्र का चेहरा

जातिवार जनगणना और आर्थिक सर्वेक्षण का महत्व सिर्फ सरकारी नौकरियों में आरक्षण और कुछ अनुदान-उपदान तक ही… Read More

सियासी तूफान के बीच नई सियासत की संभावनाओं को नये सिरे से समझना जरूरी है

अब सामने विधानसभा के चुनाव की घोषणा और 2024 के आम चुनाव के नतीजों के बाद भावनाओं… Read More

पॉपुलेरिटी से पावर नहीं मिलता तो फिर लोकतंत्र में सत्ता की शक्ति किससे मिलती है?

देश के कई राज्यों की विधानसभाओं के लिए चुनाव होना है। इन राज्यों में महाराष्ट्र भी शामिल… Read More

जनता का संकीर्ण दायरा और फैलती हुई इंसाफ की आवाज ताकत और टेर

अब जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की नरेंद्र मोदी सरकार कई मुद्दों पर लगातार पांव आगे-पीछे कर… Read More

चर्चा भिन्न तरह से हो कि ‘न्याय चाहिए’ तो न्याय को समझना जरूर चाहिए

भारत में अगस्त महीना का अतिरिक्त महत्व का होता है। 9 अगस्त 2024 को कोलकाता के आरजी… Read More