प्रफुल्ल कोलख्यान

जनता का संकीर्ण दायरा और फैलती हुई इंसाफ की आवाज ताकत और टेर

अब जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की नरेंद्र मोदी सरकार कई मुद्दों पर लगातार पांव आगे-पीछे कर… Read More

चर्चा भिन्न तरह से हो कि ‘न्याय चाहिए’ तो न्याय को समझना जरूर चाहिए

भारत में अगस्त महीना का अतिरिक्त महत्व का होता है। 9 अगस्त 2024 को कोलकाता के आरजी… Read More

सुरक्षा और सियासत की सियह-रात में लोकतंत्र का रोशनदान

हिफाजत और हिरासत में क्या फर्क है! हिरासत में हिफाजत करना हिरासत में लेनेवाली शक्ति का दायित्व… Read More

सवाल न्याय का है तो नूह की नौका में विचार और विवेक को बचाने का भी है

सभ्यता की शुरुआत से ही अनवरत आवाज गूंजती रही है, ‘न्याय चाहिए, न्याय चाहिए’! कानून का राज… Read More

उक्ति-संग्राम और मुक्ति-संग्राम के बीच प्रतिबद्धता और क्षमता का सवाल

भारत में लोकतंत्र के प्रति गहरी प्रतिबद्धता रखनेवाले राजनीतिक नेताओं की जरूरत है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने… Read More