प्रफुल्ल कोलख्यान

सत्य-तथ्य और यथार्थ के संश्लेषण से निकलता राजनीति के झूठ का प्रसार

भारत के लोगों को इस समय गहरे अर्थ में निष्कपट आत्मावलोकन की जरूरत है। राजनीतिक और आर्थिक… Read More

विपक्ष का ध्यान भटकाने का प्रयास है संविधान हत्या दिवस की घोषणा

याद किया जाना जरूरी है कि की तरह से भारतीय जनता पार्टी का राजनीतिक दुस्साहस 2019 के… Read More

राजनीतिक यथार्थ गूंगा नहीं है, राजनेताओं का लोकतांत्रिक बोध क्या बहरा है! 

समझदार लोगों ने बार-बार कहा है, देश कागज पर खींचा हुआ लकीर या नक्शा ही नहीं होता… Read More

हे राजनीति के पुरुषोत्तम गद्दी बचा रहे हैं या रद्दी बचा रहे हैं! 

नीतीश कुमार भारतीय जनता पार्टी के साथ अ-सहज हो गये थे। उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का… Read More

जय संविधान से चिढ़ और धरती की बढ़ती धड़कनों के बीच खेत-खलिहान 

भारत के राजनीतिक परिसर में बड़ी विचित्र परिस्थिति सामने खड़ी हो गई है। लोग ऐसे मुद्दों पर… Read More

लोकतंत्र की जान के हैं दुश्मन हजार, उम्मीद की किरण : संविधान लोकतंत्र रोजी-रोजगार

आम चुनाव 2024 बहुत ही प्रतिकूल परिस्थिति में संपन्न हुआ। केंद्रीय चुनाव आयोग की भूमिका बहुत ही… Read More