प्रफुल्ल कोलख्यान

सुरक्षा और सियासत की सियह-रात में लोकतंत्र का रोशनदान

हिफाजत और हिरासत में क्या फर्क है! हिरासत में हिफाजत करना हिरासत में लेनेवाली शक्ति का दायित्व… Read More

सवाल न्याय का है तो नूह की नौका में विचार और विवेक को बचाने का भी है

सभ्यता की शुरुआत से ही अनवरत आवाज गूंजती रही है, ‘न्याय चाहिए, न्याय चाहिए’! कानून का राज… Read More

उक्ति-संग्राम और मुक्ति-संग्राम के बीच प्रतिबद्धता और क्षमता का सवाल

भारत में लोकतंत्र के प्रति गहरी प्रतिबद्धता रखनेवाले राजनीतिक नेताओं की जरूरत है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने… Read More

समतामूलक और न्यायपूर्ण समाज की राजकीय आकांक्षा व्यवस्था का मुख्य सवाल है   

रोजगार और निश्चित आय का अभाव अपने-आप में अन्याय और भयावह विषमता का कारण बन जाता है।… Read More