प्रफुल्ल कोलख्यान

समतामूलक और न्यायपूर्ण समाज की राजकीय आकांक्षा व्यवस्था का मुख्य सवाल है   

रोजगार और निश्चित आय का अभाव अपने-आप में अन्याय और भयावह विषमता का कारण बन जाता है।… Read More

विवेक के बहिष्करण के चक्रव्यूह में कौतूहल, कलह और कोलाहल 

न्याय का सवाल सभ्यता का मौलिक सवाल है। अन्याय शक्तिशालियों का आयुध होता है और न्याय शक्ति-हीनों… Read More

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पक्षपात लोकतंत्र का पक्षाघात 

आजादी का पहला प्रसंग है, बोलने की आजादी। प्राणी धरती पर अस्तित्व में आते ही अपनी उपस्थिति… Read More

अंतर्विरोध विरोधाभास विभ्रम का राजनीतिक इस्तेमाल और लोकतंत्र का संकट

भारत बहुत बड़ा एवं पुराना देश और सही अर्थों में अपेक्षाकृत नया राष्ट्र है। पुराने देश और… Read More

दक्षिण और वाम रुझान में आकर्षण आग्रह और अपील का तौर-तरीका

भारतीय राजनीति और इसलिए जीवन में भी बार-बार दो शब्द सुनाई देते हैं, वाम और दक्षिण। सुनाई… Read More

गलत इरादों के साथ तैयार दुश्चक्र से भारत को बाहर निकलना ही होगा

दुनिया कहां-से-कहां पहुंच गई। दुनिया की समस्या से भारत की समस्या को कुछ भिन्न प्रकार से देखने-दिखाने… Read More

राजनीतिक अफवाह नहीं, न्यायपूर्ण शांति और सद्भाव सब का हक है

भारत में पिछले कई सालों से साधारण बातचीत से लेकर गंभीर चर्चा और ज्ञान-विमर्श यानी समाज में… Read More