बीच बहस

बहुसंख्यकवादी नैरेटिव को टेका लगाती फिल्में: स्वातंत्र्यवीर सावरकर

फिल्म जनसंचार का एक शक्तिशाली माध्यम है जो सामाजिक समझ को कई तरह से प्रभावित करता है।… Read More

विपक्ष अपने जनकल्याण के वायदे पहुंचा सका, तो भाजपा के लिए बहुमत पाना कठिन हो जाएगा

आज़ाद भारत का सबसे फैसलाकुन चुनाव सामने है। जाहिर है इसके नतीजों पर पूरी दुनिया की निगाह… Read More

कॉर्पोरेट पूंजी के हित में पीएम मोदी का संवैधानिक मूल्यों एवं लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला

कुछ दिन पहले पाकिस्तान के मशहूर प्रगतिशील शायर अहमद फराज का एक पुराना साक्षात्कार देख रहा था।… Read More

दो हजार साल पुराने जनतंत्र की डालें और पत्तियां सूख क्यों रही हैं?

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 जुलाई 2023 को जिस समय एअर इंडिया वन के विमान से… Read More

लोकतंत्र में शासक बदलते रहते हैं लोकतंत्र नहीं बदलता

परिवर्तन प्रकृति का अपरिवर्तनीय नियम है। संसार में बदलाव की प्रक्रिया जारी रहती है। इस बदलाव के… Read More