अहमदाबाद। शंकरभाई मकवाना का जन्म आज़ादी से लगभग सात साल पहले अहमदाबाद की प्रसाद मिल की चाली में हुआ था। उनके पिता इसी मिल में काम करते थे। अन्य मिल मजदूरों की तरह उनका परिवार भी मिल परिसर में बने मोहल्ले में किराये पर रहता था। इस मिल का मालिकाना हक दुर्गा प्रसाद और उनके परिवार के पास था।
1988 में यह मिल दिवालिया घोषित कर दी गई थी, हालांकि इसका संचालन 1984 में ही बंद हो गया था। इस मिल परिसर में पिछले 100 वर्षों से लगभग 80 परिवार रह रहे हैं, जो कभी इसी मिल के मजदूर थे। अधिकतर परिवार दलित समुदाय से हैं और उनके पास टेनेंसी अधिकार हैं।
शंकरभाई अब 85 वर्ष के हैं और उम्र जनित बीमारियों से जूझ रहे हैं। हाल ही में उनका ब्रेन हैमरेज का ऑपरेशन हुआ था। 27 जुलाई की सुबह करीब 6 बजे जब बारिश हो रही थी, तभी निजी बाउंसर काले और गीले कपड़ों में उनके घर में घुसे और उन्हें कुर्सी समेत उठाकर बाहर बारिश में पटक दिया। उन्होंने यह भी नहीं सोचा कि इतनी उम्र के बीमार व्यक्ति को इस तरह बाहर रखने से उनकी हालत बिगड़ सकती है।

ऐसा व्यवहार सिर्फ शंकर भाई के साथ नहीं हुआ था अन्य लोगो के साथ भी इन बाउंसरों ने ऐसा ही किया था। इसी मिल में रहने वाले वीरेंद्र भाई परमार बताते हैं, “दो दिन पहले ही अस्पताल से लौटे जीतूभाई नारनभाई चौहान को भी बाउंसरों ने इसी प्रकार कुर्सी के साथ बाहर फेंक दिया था, जबकि उनकी नाक में नली लगी थी जो डॉक्टर ने एक दिन पहले ही निकाली थी। उनकी 80 वर्षीय मां, निमोबेन चौहान को भी पुरुष बाउंसरों ने ज़बरदस्ती घसीट कर बाहर निकाला था, जिससे वह घायल हो गईं। उनकी पोती को भी घसीटा गया था, जिससे उसके पैर में चोट आई और चमड़ी छिल गई।” ये कुछ उदाहरण हैं जिससे पता चलता है कि 27 जुलाई को इस छोटी दलित बस्ती पर गुंडों का कहर टूटा था|
ये बाउंसर डंपर और बुलडोज़र के साथ आए थे। उन्होंने 18 घरों को गिरा दिया। जब बुलडोज़र धर्मीबेन गोहिल के घर पहुँचा, तो वह उसे रोकने के लिए मशीन पर चढ़ गईं और ड्राइवर को नीचे उतारने की कोशिश की। पांच-छह पुरुष बाउंसरों ने उन्हें ज़बरदस्ती नीचे उतारा। जब धर्मीबेन का विरोध तेज़ हुआ तो पुलिस ने उन्हें हवेली थाने ले जाकर डिटेन कर लिया।
पूरा अभियान पुलिस इंस्पेक्टर चिराग गोसाई की निगरानी में हुआ। 27 जुलाई को पुलिस की मौजूदगी में 18 घरों को तोड़ा गया, जिनमें अधिकतर दलितों के थे।
वीडियो बनाने पर भी कार्रवाई
चाँदखेड़ा निवासी मेहुल राठौड़ अपनी नानी से मिलने प्रसाद मिल आए थे। जब उनकी नानी को घसीटा जा रहा था तो उन्होंने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू किया। पुलिस ने उनका मोबाइल छीन लिया और उन्हें भी डिटेन कर लिया। दोनों को चार घंटे बाद छोड़ा गया।

पुलिस इंस्पेक्टर की सफाई और चेतावनी
उन्होंने डराते हुए यह भी कहा कि उनके पास उन लोगों के नाम हैं जिन्होंने सरकारी कार्य में बाधा पहुँचाने की कोशिश की थी, और वह चाहें तो अभी भी उन लोगों के विरुद्ध में एफआईआर दर्ज कर सकते हैं।
क्यों हुआ निजी पार्टी द्वारा डेमोलिशन?
‘घर आंदोलन’ से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जब पीड़ितों के साथ पुलिस इंस्पेक्टर गोसाई से मुलाक़ात की तो उन्होंने कहा, “जो कुछ हुआ, वह कानून के दायरे में हुआ। मैं सरकार का गुलाम हूं, जो आदेश मिलेगा, उसका पालन करूंगा। पीड़ित पक्ष के पास कोई कोर्ट स्टे ऑर्डर नहीं था। प्रसाद मिल की तरफ से सात दिन का नोटिस दिया गया था, जिसका पालन नहीं हुआ। नियम के अनुसार ज़मीन मालिक से 9 लाख रुपये की बंदोबस्त फीस लेकर बंदोबस्त दिया गया था ये फीस सरकारी खजाने में जमा कर दी गई है।”
प्रसाद मिल की स्थापना सितंबर 1914 में हुई थी। इसमें करीब 2500 मजदूर काम करते थे। 1988 में मिल को दिवालिया घोषित किया गया और 1998 में लिक्विडेटर ने चल संपत्तियां कोर्ट के आदेश पर बेच दिया था ताकि मिल के कर्जे चुकाए जा सकें। मिल की अचल संपत्ति 36,971.25 वर्ग मीटर है, जो अहमदाबाद के सबसे प्रमुख और कीमती इलाकों में आती है। इसके एक किलोमीटर के दायरे में साबरमती नदी, जालीवाली मस्जिद, अहमद शाह के ज़माने की जामा मस्जिद, किला, लाल दरवाज़ा बस स्टॉप, मेट्रो और सिविल, कोर्ट्स, आश्रम रोड और सरदार बाग़ जैसे महत्वपूर्ण स्थल हैं। मौजूदा बाज़ार दर के अनुसार इस ज़मीन की कीमत लगभग साढ़े तीन अरब रुपये आँकी जा रही है।

नए डायरेक्टर कौन हैं?
कंपनी रजिस्ट्रार के अनुसार 24 जनवरी, 2025 से वसंतभाई शांतिलाल अडानी, शान आनंद ज़वेरी और रिशित राजेंद्र कुमार पटेल प्रसाद मिल के नए डायरेक्टर नियुक्त हुए हैं। इससे पहले 9 सितंबर 2024 को आनंद विपिनचंद्र शाह को डायरेक्टर बनाया गया था।
* वसंतभाई अडानी गौतम अडानी के बड़े भाई हैं और अडानी एंटरप्राइजेज सहित दर्जनों कंपनियों में डायरेक्टर रह चुके हैं। वसंत भाई अडानी 30 जून, 1994 से 12 अगस्त तक अडानी एंटरप्राइज के डायरेक्टर रहे हैं। अडानी एंटरप्राइज के अलावा वसंत भाई शंतिकृपा एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के भी डायरेक्टर रहे हैं। कॉर्पोरेट अफेयर मिनिस्ट्री के अनुसार इस समय लगभग 8 कंपनियों के डायरेक्टर हैं।
* शान आनंद ज़वेरी गुजरात के प्रसिद्ध साराभाई परिवार से संबंध रखते हैं और रियल एस्टेट कारोबारी हैं।
* रिशित पटेल भी रियल एस्टेट क्षेत्र में सक्रिय हैं।
* आनंद विपिनचंद्र शाह 30 से अधिक कंपनियों में डायरेक्टर हैं और विविध कारोबार से जुड़े हैं।
जबसे इन रियल एस्टेट कारोबारियों ने डायरेक्टर पद संभाला है, तभी से मिल परिसर में रह रहे किरायेदारों पर दबाव बनाया जा रहा है कि प्रसाद मिल को खाली कर दें। पुलिस इंस्पेक्टर गोसाई ने आंदोलनकारियों को यह नहीं बताया कि बाउंसरों को किसने भेजा और पुलिस बंदोबस्त किसके कहने पर हुआ। पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “आरटीआई डाल दीजिए, रिकॉर्ड में जो है, मिल जाएगा।”
अहमदाबाद की इस दलित बस्ती को उजाड़ने और वहां के निवासियों पर अत्याचार करने में केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि टोरेंट पावर (इलेक्ट्रिसिटी कंपनी) और अहमदाबाद नगर निगम भी शामिल थे। 27 जुलाई की सुबह जब पुलिस और निजी बाउंसर वहाँ पहुंचे, तब तक बस्ती में बिजली की आपूर्ति चालू थी। लेकिन टोरेंट पावर ने बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक बिजली की सप्लाई बंद कर दी। इस प्रकार से आपूर्ति रोकना भी एक गैरकानूनी कार्रवाई है।
तोड़फोड़ (डेमोलिशन) के तुरंत बाद नगर निगम के कर्मचारियों ने इलाके की ड्रेनेज व्यवस्था को भी बंद कर दिया, जिससे लोग अब या तो सरकारी शौचालय का उपयोग करने को मजबूर हैं या फिर अपने परिचितों के शौचालय पर निर्भर हैं। ये परिवार अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
प्रसाद मिल की यह चाली जमालपुर विधानसभा क्षेत्र में आती है, जहाँ से कांग्रेस पार्टी के विधायक इमरान खेड़ावाला चुने गए हैं। वहीं, इस वार्ड के सभी चार पार्षद एआईएमआईएम पार्टी से हैं। पीड़ितों ने एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक साबिर काबलीवाला से संपर्क किया था, लेकिन उन्होंने संक्षिप्त रूप से जवाब देते हुए कहा—‘आपका विधायक इमरान खेड़ावाला है, उसी से संपर्क करो।’ खेड़ावाला ने जनचौक को बताया कि “मैं इन पीड़ितों के साथ हूँ और मैंने उन्हें उसी स्थान पर झोपड़ियाँ बनाकर डटे रहने के लिए कहा है। मैं उनके साथ पुलिस स्टेशन भी गया था। लेकिन उनके पास अदालत से डेमोलिशन रोकने का कोई स्टे आदेश नहीं था, इसी कारण यह तोड़फोड़ हो गई। आगे भी मैं इनके साथ खड़ा रहूँगा।”
(अहमदाबाद से कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)