Sunday, September 25, 2022

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बांग्ला नववर्ष और जातीय अस्मिता के सवाल पर कुछ विचार

हम अपने जीवन में ही पोयला बैशाख से जुड़ी बंगवासियों की अस्मिता के पहलू के नाना आयामों और उनके क्रमिक क्षरण के साक्षी रहे हैं। हर साल बांग्ला पत्र-पत्रिकाओं में हम इस पर एक प्रकार के विलाप के स्वरों...

इतिहास की बेईमानी का शिकार हो गया अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ आदिवासी-दलित नायकों का चुहाड़ विद्रोह

अंग्रेजों के विरुद्ध चुहाड़ विद्रोह के नायक रघुनाथ महतो का जन्म पुराने समय के बंगाल के जंगल महल (छोटानागपुर) अंतर्गत मानभूम जिले के नीमडीह प्रखंड के एक छोटे से गांव घुंटियाडीह में हुआ था। उनकी पैदाइशी की तारीख 21...

विश्व हिंदी दिवस पर विशेष: हिन्दी के नाम पर केवल सियासत हुई, समाधान नहीं हुआ

एक बार अंग्रेज़ी के वरिष्ठ लेखक कार्लाइल ने अंग्रेजी साहित्य के विद्वान विलियम शेक्सपीयर को श्रध्दांजलि देते हुए कहा था- "हे शेक्सपियर आप बहुत धन्य हैं, क्योंकि आपको हिंदी भाषा वाला विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक राष्ट्र हिंदुस्तान स्वीकार...

हाय रे, देश तुम कब सुधरोगे!

आज़ादी के 74 साल बाद भी अंग्रेजों द्वारा डाली गई फूट की राजनीति का बीज हमारे भीतर अंखुआता -अंकुरित होता रहता है। खास कर भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच में यह फसल दोनों ही देशों में अपने-अपने...

भाषा की गुलामी खत्म किये बिना वास्तविक आज़ादी संभव नहीं

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के लिए आज़ादी का सवाल केवल अंग्रेजों से देश को मुक्त कराना भर नहीं था बल्कि उनके लिए आज़ादी व्यक्ति और समाज की मुक्ति का भी प्रश्न था। यह मुक्ति अपनी भाषा में ही संभव थी...

सांप्रदायिकता और आभिजात्यता में फंसी है हिंदी

रोते-धोते हिंदी दिवस गुजर गया। लोगों ने जमकर अंग्रेजी को गलियां दी और इसके दबदबे का रोना रोया। वैसे, भाषाएं उस अर्थ में मरती नहीं हैं जिस अर्थ में प्राणी मरते हैं। वे गायब जरूर हो जाती हैं। लेकिन...

हिन्दी की रात की सुबह कब होगी?

भाषा की गुलामी बाकी तमाम गुलामियों में सबसे बड़ी होती है। दुनिया में जो भी देश परतंत्रता से मुक्त हुए हैं, उन्होंने सबसे पहला काम अपने सिर से भाषाई गुलामी के गट्ठर को उतार फेंकने का किया है। यह...

भारतीय भाषाओं पर बाजार संरक्षित अंग्रेजी का वर्चस्व

मानव निर्मित अब तक की सभी तकनीकों में भाषा का अपना अलग ही महत्त्व रहा है, लेकिन इसका एक पक्ष यह भी रहा है कि भाषा के विकास के साथ ही मानवीय शोषण और संघर्ष का भी विकास हुआ।...

हिंदुत्ववादी ट्रोलरों की भेंट चढ़ गया एक पत्रिका का नवनियुक्त संपादक

अंग्रेजी के एक युवा पत्रकार और हिंदी के उभरते आलोचक आशुतोष भारद्वाज को भारतीय उच्च शोध संस्थान की पत्रिका "चेतना" के संपादक पद से  अलग होने का  निर्णय इसलिए दुखी मन से  लेना पड़ा कि कट्टर हिंदुत्ववादियों ने भारद्वाज...

सेंट्रल विस्टा की बलिवेदी पर राष्ट्रीय अभिलेखागार

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के चर्चा में आने के बाद राष्ट्रीय अभिलेखागार, नई दिल्ली की ऐतिहासिक इमारत भी चर्चा में आ गई है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि अभिलेखागार की इमारत का कुछ हिस्सा, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट से...
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रूस और जर्मनी के बीच अनाक्रमण संधि का सच

यूक्रेन-रूस संघर्ष के साथ ही दुनिया मानो एक बार फिर से प्रथम विश्व युद्ध के पहले की परिस्थितियों में...
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