Saturday, August 13, 2022

Rahul Sankrityayan

शब्दों की रौशनी से मिली आज़ादी कहां गई?

लाल किले के प्राचीर से हर साल देश के प्रधानमंत्री 15 अगस्त को इस बात का बखान करते हैं कि अब हम आज़ाद देश हैं और विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं लेकिन हर साल...

जन्मदिन पर विशेष: ब्राह्मणवादी कवच को तोड़ कर समाज में समानता और बराबरी के ढांचे के निर्माण के पक्षधर थे राहुल सांकृत्यायन

(09 अप्रैल 1893-14 अप्रैल 1963) भारतीय उपमहाद्वीप में जन्मा कोई व्यक्ति या तो मूलत: ब्राह्मणवादी विश्व दृष्टिकोण का होता है या गैर- ब्राह्मणवादी विश्व दृष्टिकोण (श्रमण-बहुजन विश्व दृष्टिकोण) का होता। ब्राह्मणवादी विश्व दृष्टिकोण की विशेषताएं हैं- आत्मा में विश्ववास, शाश्वसत सत्य...

राहुल सांकृत्यायन और शिव पूजन सहाय की जयंती मनाने से मोदी सरकार का इनकार

पिछले दिनों पंडित दीन दयाल उपाध्याय और नानाजी देशमुख की जयंती भाजपा सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर मनाई, लेकिन आज़ादी की लड़ाई में चार बार  जेल जाने वाले और हिंदी में ज्ञान-विज्ञान का भंडार भरने वाले एक्टिविस्ट लेखक राहुल...
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बिहार का घटनाक्रम: खिलाड़ियों से ज्यादा उत्तेजित दर्शक

मैच के दौरान कई बार ऐसा होता है कि मैदान पर खेल रहे खिलाड़ियों से ज्यादा मैच देख रहे...
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