Thursday, August 18, 2022

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सत्ता के निशाने पर क्यों हैं दलित प्रोफेसर

इन दिनों दलित प्रोफेसर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र व राज्य सरकारों के निशाने पर हैं। सरकार, सत्ताधारी पार्टी और संगठन तथा प्रशासन का संरक्षण प्राप्त भगवा जमात भी इन प्रोफेसरान पर जानलेवा हमला कर रही है। आखिर दिल्ली...

सत्ता की चालों से सतर्क रहने का वक्त

आखिर वह दिन आ ही गया जिसके लिए लाखों किसान पिछले डेढ़ साल से धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ संघर्ष कर रहे थे। उनकी सबसे प्रमुख मांगों को स्वीकार करने की घोषणा खुद प्रधानमंत्री को करनी पड़ी। इस...

सत्ता का महाभोज यानी हत्या, संदर्भ मन्नू भंडारी

संविधान की शपथ लेकर बनी सरकारें महाभोज का आयोजन करती रहती हैं। सत्ता के इस महाभोज का खुराक वो साधरण मानुष होता है जो वोट देकर सरकार बनाता है बदले में उसकी जिंदगी व्यवस्था के चक्रव्यूह में फंसकर असमय...

जेपी और अन्ना आंदोलन की तरह क्या किसान आंदोलन में सत्ता बदलने की है ताकत?

(देश के 19 विपक्षी दलों द्वारा आगामी 20 सितंबर से 30 सितंबर के बीच किसान आंदोलन के समर्थन में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया गया है तथा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सभी विपक्षी दलों से 2024 का चुनाव...

वंचित समाज की राजनीतिः स्वार्थ और सत्ता से समझौते तक

भारत के जातिवादी समाज का निर्माण, धर्मसत्ता और सामंतशाही की सेवा और मेवा के लिए किया गया है। आज की धर्मसत्ता और सामंतशाही, जातिवाद को तानते, नाथते, फंदों में फंसाते, वंचितों को गुलाम बना रही है। गैर बराबरी की...

नारदा की खिड़की से बंगाल की सत्ता पर कब्जे की कोशिश

नारदा मामला में सीबीआई बहुत ही उम्मीद के साथ सुप्रीम कोर्ट गई थी। भरोसा था कि सुप्रीम कोर्ट की मदद से सुब्रत मुखर्जी फिरहाद हकीम, मदन मित्रा और शोभन चटर्जी को जेल भेजने का उनका मंसूबा पूरा हो जाएगा। पर...

समुदायों के बीच नफरत की खाईं को और गहरा करने में जुट गए हैं मीडिया और सत्ता

“मेरठ में हिन्दू आबादी पलायन कर रही है। सवा सौ घरों पर ‘घर बिकाऊ है’ चस्पा है। हिन्दू लड़कियों से छेड़छाड़ हो रही है। मंदिर पर पत्थर फेंके जा रहे हैं।” ये सूचनाएं ख़बर के तौर पर बेचैन करने वाली हैं। मगर,...
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शीर्ष पदों पर बढ़ता असंतुलन यानी संघवाद को निगलता सर्वसत्तावाद 

देश में बढ़ता सर्वसत्तावाद किस तरह संघवाद को क्रमशः क्षतिग्रस्त कर रहा है, इसके उदाहरण विगत आठ वर्षों में...
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