Sunday, September 25, 2022

victory

हैरी पॉटर और चम्बल किसानों की जीत, उसके चार सबक

इन दिनों की ख़ास बात "क्या हो रहा है नहीं है", इन दिनों की विशिष्ट पहचान या प्रभावी सिंड्रोम "अब कुछ नहीं हो सकता" का अहसास है। बड़े जतन, बड़े भारी खर्चे और योजनाबद्ध तरीके से इसे समाज के...

उप चुनावों में विपक्ष का झंडा बुलंद

नई दिल्ली। देश के विभिन्न राज्यों में हुए उपचुनावों में बीजेपी को तगड़ा झटका लगा है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस तो बिहार में आरजेडी और छत्तीसगढ़ एवं महाराष्ट्र में कांग्रेस को बड़ी सफलता मिली है। पश्चिम बंगाल की...

सोचिये जरा, उत्तर प्रदेश जीतने के लिए भाजपा ने किस-किस को हरा डाला!

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश समेत चार राज्यों में शानदार वापसी के फलस्वरूप भारतीय जनता पार्टी के बल्लियों उछलते हौसले की बाबत ढेर सारी बातें कही जा चुकी हैं। इसलिए कुछ बातें समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल,...

कारपोरेट शक्ति पर लोक शक्ति की विजय का वर्ष

देश के किसानों के लिए यह वर्ष ऐतिहासिक आंदोलन की सफलता का वर्ष रहा। वर्ष की शुरुआत बॉर्डरों पर किसान आंदोलन पर सरकारों के बेबुनियाद आरोपों और फ़र्ज़ी मुकदमों से हुई। बॉर्डरों पर किसानों को हमले भी झेलने पड़े।...

कॉरपोरेटी हिंदुत्व के फासीवादी फंदे से देश को निकालना ही नये साल का असली संकल्प

2021 के अंतिम तिमाही में कालिनेम, शिखंडी, खड्गसिंह और गोडसे का जिंदा होना क्या महज संयोग है कि सोचा समझा प्रयोग। 2021 की शुरुआत महामारी की क्रूर छाया और लोकतंत्र पर फासीवाद के मरणांतक हमले के साथ हुई थी।वहीं...

किसान आंदोलन: जश्न के बीच से झांकती चुनौतियां

यहां सड़क पर कीले उगीं हैं। कंटीले तारों ने अपने ही देश के नागरिकों को जानवरों की तरह घेर रखा है। आपका स्वागत फौज़ी बूटों की कर्कश ध्वनियों से होता है। यह कश्मीर नहीं किसानों के आंदोलन-स्थल की तस्वीर...

संघर्ष का टेम्पलेट जो किसान आंदोलन ने दिया है

संयुक्त किसान मोर्चा ने 378 दिन के बाद अपने आंदोलन को स्थगित करते हुए कहा कि ‘लड़ाई जीत ली गई है, लेकिन किसानों के हक-खास कर एमएसपी को किसानों के कानूनी अधिकार के रूप में हासिल करने का युद्ध...

जीत गया लोकतंत्र, हार गयी तानाशाही

लोकतंत्र आज एक बार फिर जीत गया। लोकतंत्र की वह डोर जो छूटती जा रही थी जनता ने आज फिर से उसे मजबूती से पकड़ ली। सत्ता की तमाम संस्थाएं जब अपनी जवाबदेहियों से पीछे हट रही थीं और...

विजय के बाद भी किसानों के सामने खड़ा है चुनौतियों का पहाड़

हाल ही में 18 नवंबर को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में सुरख लीह के संपादक और बीकेयू (उगराहन) के समन्वयक पावेल कुसा द्वारा एक सबसे प्रेरक भाषण दिया गया था। हाल के महीनों में उन्होंने पंजाबी अखबारों में नव...

कारगिल शौर्य दिवस की रोशनी में भुला दिया गया शहीदों के परिवारों का अंधेरा

आज से ठीक 22 वर्ष पूर्व 1999 में भारत और पाक के बीच एक साठ दिन लम्बा युद्ध चला, जो 26 जुलाई 1999 को समाप्त हुआ। भारत की सीमा में स्थित कारगिल नामक एक जगह पर स्थित एक पहाड़...
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रूस और जर्मनी के बीच अनाक्रमण संधि का सच

यूक्रेन-रूस संघर्ष के साथ ही दुनिया मानो एक बार फिर से प्रथम विश्व युद्ध के पहले की परिस्थितियों में...
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