बीआरएस विधायकों की अयोग्यता का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना स्पीकर को भेजा अवमानना नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बीआरएस विधायकों के अयोग्यता मामले पर तेलंगाना के स्पीकर को अवमानना नोटिस जारी किया है। यह नोटिस, विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेने के निर्देश का पालन न करने के लिए जारी किया।

बीआरएस के 10 विधायकों की अयोग्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष को दो सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है, साथ ही मामले में तेजी लाने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने आदेशों का पालन नहीं करने पर विधानसभा अध्यक्ष को अवमानना नोटिस जारी कर उनकी जवाबदेही तय की है।

इस मामले की पृष्ठभूमि में ये विधायकों का बीआरएस से कांग्रेस में शामिल होना और इसके आधार पर उनकी सदस्यता की वैधता पर सवाल उठना शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश दिया कि वह तीन महीने के भीतर विधायकों की अयोग्यता का निर्णय सुनाए। यदि विधायकों की अयोग्यता का निर्णय देरी से होता है, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर डालने वाला माना जाएगा।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अयोग्यता मामलों में त्वरित और न्यायसंगत निर्णय लेना आवश्यक है ताकि विधायकों के प्रति जनता का विश्वास बना रहे और राजनीतिक व्यवस्था सुदृढ़ बनी रहे। इस आदेश से यह संकेत मिलता है कि भारत की न्याय व्यवस्था राजनीतिक दलों के बीच विधायकों की सदस्यता विवादों को गंभीरता से देखती है और संवैधानिक नियमों के अनुपालन को प्राथमिकता देती है।

इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने बीआरएस विधायकों की अयोग्यता मामले में नियम और कानूनी प्रक्रिया के पालन को सख्ती से लागू करते हुए घोषित किया है कि विधानसभा अध्यक्ष को शीघ्र निर्णय लेना होगा और इसका उल्लंघन गंभीर परिणामों से जुड़ा होगा।

यह मामला लोकतंत्र और विधायिका की कार्यप्रणाली के संरक्षण के लिये महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे राजनीतिक दलबदल के मामलों में पारदर्शिता और कानूनी निश्चितता सुनिश्चित हो सके।

बीती 31 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने विधानसभा स्पीकर को निर्देश दिया था कि वे तीन महीने के भीतर बीआरएस के 10 विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लें।

हालांकि स्पीकर ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद तय समयसीमा के भीतर फैसला नहीं लिया। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिस पर सुनवाई के दौरान पीठ ने इसे अदालत की घोर अवमानना माना और स्पीकर को नोटिस जारी किया है। हालांकि पीठ ने तेलंगाना स्पीकर को अभी अगले आदेश तक अदालत में पेश होने से छूट दे दी है।

तेलंगाना विधानसभा स्पीकर कार्यालय की तरफ से भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसमें विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेने के लिए आठ हफ्तों का समय और देने की मांग की गई है। इस याचिका पर भी अदालत ने नोटिस जारी किया है। स्पीकर ऑफिस की तरफ से पेश हुए वकील ने बताया कि विधायकों की अयोग्यता संबंधी चार मामलों पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और तीन अन्य में सबूत रिकॉर्ड किए जा चुके हैं।

इस पर सीजेआई ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ये अब तक पूरा हो जाना चाहिए था। यह अदालत की घोर अवमानना है। अब ये वो ही फैसला करें कि क्या वे नए साल का जश्न मनाना चाहते हैं।’ अदालत ने फिलहाल मामले की सुनवाई चार हफ्तों के लिए टाल दी है।

जिन विधायकों की अयोग्यता पर फैसला होना है, वे बीआरएस छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। दल-बदल विरोधी कानून के तहत स्पीकर को विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेना था, लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो बीआरएस नेता केटी रामाराव, पदी कौशिक रेड्डी और केओ विवेकानंद ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

जिसके बाद बीती 31 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने विधानसभा स्पीकर को निर्देश दिया था कि वे तीन महीने के भीतर बीआरएस के 10 विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लें।

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