हिसार: शांति और सौहार्द्र के लिए काम करने वाले पत्रकार के खिलाफ प्रशासन का शांति भंग के लिए कारण बताओ नोटिस

देश में पत्रकारिता करना आज केवल एक पेशा नहीं, बल्कि जोखिम भरा काम बनता जा रहा है। सच लिखने और जनता की आवाज़ उठाने वाले पत्रकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं—कहीं धमकी, कहीं मारपीट, तो कहीं पुलिस के द्वारा ही उन्हें नोटिस थमा दिए जाते हैं। 

एक तरफ वह मीडिया है जिस पर सरकार का पूरा कब्जा है। और दूसरी तरफ स्वतंत्र पत्रकारिता है जो जनता की पैरवी करती हुई उनके हकों की आवाज उठाती है और जनता के वास्तविक हालातों से दुनिया को अवगत कराती है। 

लेकिन फासीवादी बीजेपी-आरएसएस सरकार लगातार सच्ची रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर हमलावर है। 

हिसार में Jan Manch Haryana के स्वतंत्र पत्रकार उदय चे को हिसार पुलिस ने नोटिस जारी किया है। उदय जो लंबे समय से स्वतन्त्र पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं और जनता की आवाज को बखूबी उठाते हैं, 25 दिसंबर को चर्च में मनाए जाने वाले क्रिसमस और क्रांतिमान पार्क में बजरंग दल के कार्यक्रम की लगातार रिपोर्टिंग कर रहे थे।

जिस पत्रकार ने शहर में धार्मिक सौहार्द्र और शांति बनी रहे, इसके लिए सबसे ज्यादा प्रयास किए। पुलिस ने उसी को सांप्रदायिक सौहार्द्र, भाईचारा और शांति भंग करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसी के साथ यही कवरेज करने के कारण बीबीएन के मालिक विपिन खुराना को भी नोटिस जारी हुआ है।

दरअसल हिसार की मुख्य चर्च में 25 दिसंबर को ईसाइयों के द्वारा क्रिसमस दिवस मनाया जाना था। लेकिन बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ने “हिंदू शक्ति संगम” नाम से एक कार्यक्रम 25 दिसंबर को ही रखा वो भी चर्च के सामने क्रांतिमान पार्क में। इस पार्क को क्रिसमस के लिए हर साल इस्तेमाल किया जाता था।

और जिस श्रद्धानंद की पुण्यतिथि पर बजरंग दल ने ये कार्यक्रम रखा था उनकी मृत्यु तो 23 दिसंबर को हुई थी।

लेकिन बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के सदस्य शहर का माहौल खराब करने और ईसाइयों के प्रति धार्मिक दंगे भड़काने के लिए क्रिसमस के दिन चर्च के सामने ये कार्यक्रम कर रहे थे जो शहर के सामाजिक संगठन पहले ही समझ चुके थे।

इसलिए सभी संगठन इसके खिलाफ एकजुट हुए और इनकी साजिश को नाकाम करने के लिए शहर के एसपी, नगर निगम के कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा। और खुद भी मौके पर मौजूद रहे। जिसके कारण ही शहर में अमन कायम हो सका और क्रिसमस का त्यौहार शांति से मनाया जा सका।

नहीं तो हिसार में भी वही होता जो इनके गुंडों ने बरेली, रायपुर में किया और देश के अलग अलग हिस्सों में कैसे धार्मिक उन्माद फैलाया और तोड़फोड़ की।

ऐसा ही ये हिसार में करते जो ये नहीं कर सके।

पत्रकारों पर हमले यहीं नहीं रुकते हैं। पहले भी जय भीम आर्मी न्यूज़ चैनल के संजय चौहान, जो दलित उत्पीड़न की कवरेज़ कर रहे थे। उसको 2 से 3 महीने जेल में रखा गया और हिरासत में उनके पांव तोड़ दिये गए। इसके खिलाफ सभी सामाजिक संगठनों को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। नहीं तो जनता की आवाज उठाने वाली एकमात्र बची मीडिया को भी सरकार खत्म कर देगी। 

इसलिए हम पुलिस द्वारा स्वतंत्र पत्रकार उदय चे और बाकी पत्रकारों को नोटिस जारी कर उन्हें परेशान करने की कड़ी निंदा करते हैं। इसे एक बड़े हमले के रूप में समझा जाना चाहिए और इसके खिलाफ एकजुट होना चाहिए।

(हिसार के सामाजिक संगठनों की ओर से जारी एक अपील।)

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