इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ मल्टी-एजेंसी जांच और इसके संस्थापक अभिजीत दिपके को अमेरिका से भारत लाने की मांग वाली पिटीशन पर सुनवाई करने से मना कर दिया।
जस्टिस शेखर बी सराफ और जस्टिस अबदेश कुमार चौधरी की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर, जो कर्नाटक के रहने वाले हैं, को वहां के हाईकोर्ट जाना चाहिए था।
बेंच ने कहा “याचिका देखने पर, पहली बात जो हमें समझ में आई, वह यह है कि याचिकाकर्ता बेंगलुरु का स्थायी निवासी है। याचिका और हलफनामे में में, याचिकाकर्ता ने अपना पता बेंगलुरु-560020 दिखाया है। हमारे हिसाब से, याचिकाकर्ता, जो बेंगलुरु का निवासी है और राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा उठा रहा है, अगर वह ऐसा चाहता तो उसे पहले कर्नाटक हाई कोर्ट जाना चाहिए था।”कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले के तथ्य उत्तर प्रदेश से संबंधित नहीं थे।
अदालत ने कहा “मौजूदा याचिका में, हमें उत्तर प्रदेश राज्य के बारे में कुछ भी खास नहीं मिला, और इसलिए, हमारा मानना है कि फोरम नॉन कन्वीनियंस के कारण याचिका इस कोर्ट के सामने मेंटेनेबल नहीं है।”
याचिका में सीजेपी और अभिजीत के सभी सोशल मीडिया खाते ब्लॉक करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। इसके अलावा सीजेपी और अभिजीत से जुड़े पोस्ट, वीडियो, रील और दूसरे कंटेंट को हटाने की भी मांग की गई, जो सुप्रीम कोर्ट की बातों का गलत इस्तेमाल करते हैं, उन्हें तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं या गलत तरीके से दिखाते हैं।
याचिका में सीजेपी और उसके संस्थापक द्वारा चलाए जा रहे कथित “विदेशी फंडेड इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर कैंपेन” की जांच के लिए गृह मंत्रालय की देखरेख में इंटेलिजेंस और विभिन्न जांच एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों की विशेष जांच टीम बनाने का भी अनुरोध किया गया है। इसके अलावा राष्ट्रीय जांच एजेंसी और प्रवर्तन निदेशालय से आपराधिक मामला दर्ज करने, अभिजीत के ख़िलाफ़ लोक आउट सर्कुलर जारी करने और अमेरिका से भारत वापसी सुनिश्चित करने के लिए प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू करने की भी माँग की गई है।
सोशल मीडिया में सीजेपी आंदोलन 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के कॉकरोच वाली कथित टिप्पणी के बाद शुरू हुआ।
मुख्य न्यायाधीश ने अपनी मौखिक टिप्पणियों में कथित रूप से कहा था कहा कि ऐसे युवा “कॉकरोच की तरह” समाज में पैरासाइट बन रहे हैं। उन्होंने बाद में हालांकि साफ़ किया कि वह उन लोगों की बात कर रहे थे जिनके पास नकली डिग्री है और जो ऐसी गतिविधियों में शामिल हैं।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)