Wednesday, December 7, 2022

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अलविदा! समाजवादी योद्धा मुलायम सिंह

उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे एवं देश के रक्षा मंत्री रहे समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव का 10 अक्तूबर को मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। नौ अक्तूबर को मैं मेदांता अस्पताल नेताजी को देखने गया था।...

नेहरू के भाषणों के आइने में नरेंद्र मोदी की स्पीच

वैसे तो प्रधानमंत्री जी के संसद में दिए गए भाषण भी चुनावी भाषणों की भांति होते हैं और इनमें कटुता तथा व्यक्तिगत आक्षेपों की प्रचुरता होती है किंतु चुनावी भाषणों की जो शैली उन्होंने विकसित की है वह तो...

स्मृति दिवस: मामा बालेश्वर ने कराया था रियासतों में बेगारी प्रथा और स्वतंत्र भारत में जागीरदारी प्रथा का खात्मा

मामाजी बालेश्वर दयाल जी का 26 दिसंबर को 23 वां स्मृति दिवस है। आज 25 दिसंबर की रात मामा जी के 25 हजार से ज्यादा अनुयायी राजस्थान से 3 दिनों से पदयात्रा करते हुए बामनिया भील आश्रम पहुंचेंगे, जहां...

डॉ.लोहिया की पुस्तक ‘एक्शन इन गोवा’ के हिंदी, मराठी और कोंकणी वर्जन का लोकार्पण

डॉ. राममनोहर लोहिया की 54 वीं पुण्यतिथि पर उनकी लिखी पुस्तक एक्शन इन गोवा का हिन्दी के साथ ही कोंकणी और मराठी में हुए अनुवाद का गोवा और हैदराबाद में लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक हिन्दी अनुवाद के लिए...

लोहिया की पुण्यतिथि: सड़कें तो सुनसान नहीं रहीं लेकिन संसद जरूर आवारा हो गयी!

कल्पना कीजिए, यदि आज डॉ लोहिया जीवित रहते तो, साल भर से हो रहे किसान आंदोलन में, उनकी क्या भूमिका रहती। लोहिया को जानने वाले और उस कुजात गांधीवादी के लेखों, भाषणों का अध्ययन करने वाले एकमत से यही...

जेपी-लोहिया की विरासत को मजबूती देता किसान आंदोलन

आज समाजवादी चिंतक, प्रखर सांसद, सप्तक्रांति विचार को प्रतिपादित करने वाले,पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु की गद्दी को झकझोर देने वाले डॉ.राम मनोहर लोहिया की 54 वीं पुण्यतिथि है। कल 11 अक्टूबर को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 119 वी जयंती...

डॉ.लोहिया के ‘गैर कांग्रेसवाद’ के नारे पर खेल रहे हैं पीएम मोदी

आज जिस 'कांग्रेस मुक्त भारत' नारे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खेल रहे हैं। असल में यह डॉ. राम मनोहर लोहिया का 'गैर कांग्रेसवाद' का नारा था। दरअसल आजादी के बाद कांग्रेस की गलत नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले...

लोहिया की प्रासंगिकता और उनसे जुड़े सवाल

महापुरूषों की स्मृति और मूल्यांकन से ही कोई समाज ऊर्जा ग्रहण कर निखर सकता है। गांधी जी के बाद डॉक्टर राममनोहर लोहिया ही सबसे प्रखर विचारक-चिंतक रहे हैं। अपनी धरती-मिट्टी, उसकी सुगंध से जुड़े हुए हैं। छिटपुट लेखन-भाषण, सभा-गोष्ठियों...

वर्ग और जाति के बीच की केमेस्ट्री

वीरेन्द्र यादव की फेसबुक वॉल पर जाति और वर्ग के बारे में डा. लोहिया के विचार के एक उद्धरण* के संदर्भ में : जाति हो या वर्ग, दोनों ही सामाजिक संरचना की प्रतीकात्मक श्रेणियाँ (Symbolic categories) हैं। भले कभी...

गैर भाजपावाद की रणनीति को कामयाब करने के लिए समाजवादी एकजुटता वक्त की जरूरत

    आज 17 मई 2021 को कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के भारत में गठन के 87 वर्ष हो रहे हैं। यदि कोरोना काल नहीं होता तो हम पटना में समाजवादी समागम में अवश्य मिलते लेकिन आज सभी कार्यक्रम ऑनलाइन...
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