नस्ल, क्षेत्र, लिंग और जाति के आधार पर व्यक्तियों की पहचान करने से सख्ती से निपटा जाना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पूर्वोत्तर और अन्य क्षेत्रों के नागरिकों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा रोकने संबंधी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि नस्ल, क्षेत्र, लिंग और जाति के आधार पर व्यक्तियों की पहचान करना प्रतिगामी मार्ग पर चलने के समान होगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा, अपराध, अपराध है और इससे सख्ती से निपटा जाना चाहिए। पीठ ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी को याचिका पर विचार करने और उसे उचित प्राधिकारी को भेजने का निर्देश दिया।

देहरादून में त्रिपुरा के युवक एंजेल चकमा की मौत से जुड़ी जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वह इस मुद्दे पर नए दिशानिर्देश जारी नहीं करेगी। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत का उद्देश्य समाज के व्यवहार को सुधारना नहीं, बल्कि कानून के दायरे में न्याय सुनिश्चित करना है।

उन्होंने टिप्पणी की कि नस्ल, भाषा या क्षेत्र के आधार पर लोगों को अलग पहचान देने वाली गाइडलाइन बनाना नई समस्याएं खड़ी कर सकता है। मुख्य न्यायाधीश ने सवाल उठाया “75 साल बाद हम यहां तक पहुंच गए हैं?” उन्होंने कहा कि वास्तविक जरूरत समाज की सोच बदलने और भाईचारे को मजबूत करने की है।

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्वोत्तर के छात्रों को नस्लीय भेदभाव, हेट स्पीच और हिंसा से बचाने के लिए दाखिल याचिका को पूरी तरह खारिज नहीं किया। अदालत ने इस याचिका की एक प्रति भारत के अटॉर्नी जनरल को सौंपने का निर्देश दिया, ताकि वे इस मामले को उचित प्राधिकरणों के सामने उठा सकें। याचिका में मांग की गई थी कि उत्तर‑पूर्वी नागरिकों के खिलाफ नस्लीय हमलों को ‘हेट क्राइम’ घोषित किया जाए और केंद्र व राज्य स्तर पर इसके लिए विशेष पुलिस इकाइयाँ, नोडल एजेंसियां और जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए जाएं।

जनहित याचिका में पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के खिलाफ नस्लीय हिंसा से निपटने में संवैधानिक विफलता की न्यायिक जांच की मांग की गई थी। इसमें कहा गया था कि यह मामला भारत के संवैधानिक अधिकारों के अनुच्छेद 14, 19 (1) (ए) एवं (जी) और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि एंजेल चकमा ने हमले के समय सवाल पूछते हुए कहा था, हम भारतीय है इसके लिए हमें कौन सा सर्टिफिकेट दिखाना होगा।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)

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