Friday, December 2, 2022

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प्रधानमंत्री का स्वतंत्रता दिवस भाषण: कथनी से ज्यादा करनी का विद्रूप 

आदरणीय प्रधानमंत्री जी का स्वतंत्रता दिवस उद्बोधन कुछ ऐसा था कि जो कुछ उन्होंने कहा वह चर्चा के उतना योग्य नहीं है जितना कि वे मुद्दे हैं जिन पर उनका भाषण केंद्रित होना चाहिए था। वर्ष 2017 में  प्रधानमंत्री जी...

बांग्ला नववर्ष और जातीय अस्मिता के सवाल पर कुछ विचार

हम अपने जीवन में ही पोयला बैशाख से जुड़ी बंगवासियों की अस्मिता के पहलू के नाना आयामों और उनके क्रमिक क्षरण के साक्षी रहे हैं। हर साल बांग्ला पत्र-पत्रिकाओं में हम इस पर एक प्रकार के विलाप के स्वरों...

काशी विश्वनाथ धाम कोरिडोर: धर्म क्षेत्र का कारपोरेटीकरण

प्रथमचरण 30 वर्ष पहले उदारीकरण निजीकरण और वैश्वीकरण की नीतियां भारत में लागू की गईं। जहां से भारत के विविध क्षेत्रों का निजीकरण यानी कॉरपोरेटाइजेशन शुरू हुआ। पहली प्राथमिकता थी कि इन नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए अब तक...

कांग्रेस के लिए दुखती रग बनता जा रहा है पंजाब

पंजाब का मसला कांग्रेस के लिए दुखती रग बनता जा रहा है। अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाये जाने को लेकर पार्टी के असंतुष्ट गुट, जी23, के नेताओं ने पार्टी आलाकमान पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं...

प्रयागराज: आदिवासी प्रधान पर टूटा खाकी का कहर! थाने में बंद करके पीटा और फिर संगीन धाराओं के तहत भेज दिया जेल

नरेंद्र मोदी के शासन वाले ‘न्यू इंडिया’ में जैसा कि आम चलन है कि किसी गांव, गली, शहर या मोहल्ले में कोई अजनबी या संदिग्ध दिख जाये तो उसकी मॉब लिंचिंग कर दी जा रही है। लेकिन सेहुड़ा गांव के ग्राम...

मोदी के न्यू इंडिया का मकसद भारत को भूत के अंधेरे में ले जाना है: सीताराम येचुरी

"मोदी के न्यू इंडिया का मकसद  आजादी के बाद भविष्य के उजाले की तलाश में लगे भारत को भूतकाल के अँधेरे में ले जाना है।  आज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि संवैधानिक व्यवस्था को ध्वस्त करने की...

लक्षद्वीप में भी आग लगाने की साजिश !

लक्षद्वीप एक बहुत ही शांत द्वीप रहा है जहां भारतीय जनता पार्टी ने वही प्रयोग शुरू कर दिया है जो उत्तर भारत में कर चुकी है। भाजपा ने जबसे गुजरात के एक पूर्व विधायक प्रफुल्ल पटेल को यहां का...

‘न्यू वेल्फेयरिज्म’ से मुक्ति बिना न नई राजनीति, न देश का कल्याण

पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (एनएफएचएस-5) के आंकड़े पिछले दिसंबर में जारी हुए, तो उनसे एक बेहद चिंताजनक तथ्य सामने आया। 2015 से 2019 के बीच दशकों में ऐसा पहली बार हुआ कि देश में शारीरिक रूप से अविकसित...

राष्ट्रीय शिक्षा-नीति 2020: नव-उपनिवेशीकरण की दिशा में छलांग

नई राष्ट्रीय शिक्षा-नीति 2020 (यहां से आगे शिक्षा-नीति) में शिक्षा के निजीकरण से आगे शिक्षा का निगमीकरण (कारपोरेटाइजेशन) करते हुए, भारतीय शिक्षा के नव-उपनिवेशीकरण (नियो-कोलोनाइजेशन) की दिशा में एक लंबी छलांग लगाई गई है। शिक्षा-नीति के इस नए आयाम...

नए भारत में बदहाल किसान

सरकार कोविड-19 के कारण उत्पन्न स्वास्थ्य आपातकाल जैसी दशाओं के मध्य - जबकि संसद से बाहर और संसद में भी चर्चा, विमर्श, प्रतिरोध एवं जनांदोलन के लिए स्थान लगभग नगण्य है- कृषि सुधारों को अध्यादेशों के रूप में चोर...
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रवीश में संभावनाओं का कोई अंत नहीं! 

मोदी-अडानी, अर्थात् सरकार-कारपोरेट की धुरी का एनडीटीवी पर झपट्टा भारत के मीडिया जगत में एक घटना के तौर पर...
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